Bihar News : भागलपुर कोर्ट में जगदीशपुर CO सतीश कुमार पर दर्ज हुआ नालसी मुकदमा, 87 कट्ठा जमीन का गलत दाखिल ख़ारिज करने का है आरोप

BHAGALPUR : बिहार के भागलपुर जिले में जमीन विवाद को लेकर एक बड़ा कानूनी मामला सामने आया है, जिसमें जगदीशपुर के अंचलाधिकारी (CO) सतीश कुमार सीधे तौर पर घेरे में हैं। भागलपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में उनके खिलाफ एक नालसी मुकदमा दायर किया गया है। यह मामला मानिक सरकार घाट रोड निवासी तपन विश्वास द्वारा दर्ज कराया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अंचलाधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट और भागलपुर के सब-जज द्वारा पारित आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है।

अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में गुहार

पीड़ित पक्ष की ओर से भागलपुर सिविल कोर्ट के चर्चित अधिवक्ता आलय बनर्जी ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं। अधिवक्ता के अनुसार, जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, उस पर पहले से ही न्यायालय का स्पष्ट आदेश प्रभावी था। इसके बावजूद, प्रशासनिक पद पर रहते हुए सीओ ने न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान नहीं किया। इस मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि मामला सीधे तौर पर सर्वोच्च अदालत के निर्देशों से जुड़ा है।

करोड़ों की जमीन और मिलीभगत के आरोप

मुकदमे में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जगदीशपुर सीओ सतीश कुमार ने विपक्षी पार्टियों के साथ कथित तौर पर 'तालमेल' बिठाया और बेशकीमती करीब 87 कट्ठा जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) गलत तरीके से कर दिया। आरोप है कि कोर्ट के स्थगन या प्रतिकूल आदेश के बावजूद विपक्षियों के नाम पर जमीन की रसीद निर्गत कर दी गई। इस जमीन की बाजार दर करोड़ों में बताई जा रही है, जिसे लेकर भू-माफिया और अधिकारियों के बीच सांठगांठ की आशंका जताई गई है।

नामजद किए गए अन्य आरोपी

इस कानूनी कार्रवाई में केवल अंचलाधिकारी ही नहीं, बल्कि विपक्षी पक्ष की नूतन मिश्रा सहित अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन सभी ने मिलकर न्यायिक आदेशों को दरकिनार किया और धोखाधड़ी के जरिए जमीन के सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की। कोर्ट में दाखिल परिवाद में इन सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है ताकि भविष्य में कोई भी लोक सेवक न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने का दुस्साहस न कर सके।

न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासन की प्रतिक्रिया

CJM कोर्ट में मामला दर्ज होने के बाद अब गेंद न्यायपालिका के पाले में है। कोर्ट इस मामले में गवाहों के बयान और पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर संज्ञान ले सकता है। दूसरी ओर, इस मामले ने जिले के अन्य राजस्व अधिकारियों के बीच भी हलचल तेज कर दी है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी चल सकता है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर अंचल कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

बालमुकुन्द की रिपोर्ट