Bihar Storm News: बेटे के सामने पिता की दर्दनाक मौत, आंधी-पानी ने शादी की खुशियों पर लगाया ग्रहण, विक्रमशिला सेतु पर उड़ती टीन बनी काल

Bihar Storm News: तेज आंधी और बारिश ने एक खुशहाल परिवार की जिंदगी को गहरे मातम में बदल दिया।...

बेटे के सामने पिता की दर्दनाक मौत- फोटो : reporter

Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु पर सोमवार शाम आई तेज आंधी और बारिश ने एक खुशहाल परिवार की जिंदगी को गहरे मातम में बदल दिया। शादी की तैयारियों के बीच खरीदारी कर लौट रहे पिता-पुत्र पर ऐसा कहर टूटा कि देखते ही देखते घर की खुशियां चीखों में बदल गईं। उड़ती टीन और लोहे का ढांचा एक व्यक्ति की जान ले गया, जबकि उसका 13 वर्षीय बेटा सब कुछ अपनी आंखों के सामने होते देखता रह गया।

नवगछिया के सोनवर्षा निवासी 40 वर्षीय विनय कुमार अपने बेटे लक्की के साथ भागलपुर से शादी की खरीदारी कर घर लौट रहे थे। मौसम अचानक बिगड़ने पर दोनों ने विक्रमशिला सेतु पर बने एक शेड के नीचे रुकने का फैसला किया। लेकिन किसे पता था कि यही शरणस्थली मौत का फंदा बन जाएगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज आंधी के झोंके इतने प्रचंड थे कि शेड का ढांचा अचानक उखड़ गया। भारी टीन और लोहे का हिस्सा सीधे विनय कुमार के सिर पर गिरा। बेटा लक्की कुछ समझ पाता, उससे पहले ही उसका पिता गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों ने मलबा हटाकर उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचाया गया। पुल पर ही वह लंबे समय तक तड़पते रहे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। बाद में उन्हें मायागंज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।इस दर्दनाक घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मायागंज अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के सामने सड़क जाम कर दिया और प्रशासन से मुआवजे व जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने सरकारी सहायता और जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रित की जा सकी।

यह हादसा अब विक्रमशिला सेतु की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर बने अस्थायी ढांचे और शेड की नियमित जांच नहीं होती, जिससे ऐसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। चार दिन बाद जिस घर में शादी की शहनाइयां गूंजनी थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। एक पिता ने बेटे को बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी, लेकिन यह सवाल पीछे छोड़ गए कि क्या लापरवाही और कमजोर संरचनाएं ऐसे हादसों को बार-बार जन्म देती रहेंगी।

रिपोर्ट - अंजनी कुमार कश्यप