Bihar News : भागलपुर शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला जारी! कहीं FIR तो कहीं वेतन से 50% कटौती, सरकारी राशि के हिसाब पर उठे गंभीर सवाल

Bihar News : बिहार के शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और गड़बड़ियों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

भागलपुर में वित्तीय अनियमितता - फोटो : BALMUKUND

BHAGALPUR : जिले के शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कभी सरकारी राशि के हिसाब-किताब को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं तो कभी वित्तीय गड़बड़ी के मामलों में अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई की नौबत आ रही है। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर शिक्षा विभाग की वित्तीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने की कार्रवाई सामने आई है, वहीं दूसरी ओर मध्याह्न भोजन योजना में 1 लाख 24 हजार 931 रुपये की नियम विरुद्ध निकासी के मामले में प्रखंड साधन सेवी रजनीश कुमार दास के मानदेय से 50 प्रतिशत कटौती कर राशि वसूलने का आदेश जारी किया गया है।

1.24 लाख की वसूली, जिला कार्यालय में प्रतिनियुक्ति

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, पीएम पोषण योजना की ओर से 4 नवंबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, रजनीश कुमार दास के समेकित मासिक पारिश्रमिक से 50 प्रतिशत की कटौती कर कुल 1,24,931 रुपये की वसूली की जाएगी। पूरी राशि की वसूली होने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से जिला कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है। वहीं शाहकुंड प्रखंड में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन के लिए जगदीशपुर के प्रखंड साधन सेवी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

कार्रवाई हो रही है, फिर भी क्यों सामने आ रहे मामले?

लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं की स्थिति क्यों बन रही है? सरकारी योजनाओं की राशि के आवंटन, निकासी और खर्च की निगरानी करने वाली व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या अनियमितता सामने आने के बाद कार्रवाई करना ही प्रशासन की जिम्मेदारी है, या ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं हो, इसके लिए पहले से जवाबदेही तय होनी चाहिए?

वित्तीय पारदर्शिता जरुरी 

सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे बच्चों की शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों पर हैं कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

भागलपुर से बालमुकुंद कुमार की रिपोर्ट