Bihar Land News: राजस्व विभाग में बड़े खेल का खुलासा, गैर-मजरूआ जमीन का हो गया दाखिल-खारिज, नपेंगे ये अधिकारी

Bihar Land News: राजस्व विभाग में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों की मिली भगत से गैर मजरूआ जमीन का दाखिल खारिज कर दिया गया है। इस मामले में अब कार्रवाई होगी।

राजस्व विभाग में खेला! - फोटो : social media

Bihar Land News: भागलपुर जिले के जगदीशपुर अंचल में सरकारी गैर-मजरूआ जमीन को अवैध रूप से निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। कानून के अनुसार बिहार सरकार की गैर-मजरूआ जमीन किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज नहीं की जा सकती, इसके बावजूद दो अलग-अलग खातों में कुल सात डिसमिल गैर-मजरूआ भूमि का म्यूटेशन कर दिया गया। इस पूरे मामले की जानकारी उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा और जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी को रविवार को साक्ष्यों के साथ दी गई है।

दो वादों में हुआ अवैध म्यूटेशन

जानकारी के अनुसार, दाखिल-खारिज वाद संख्या 2955/2025-26 के तहत, खाता संख्या 499, खेसरा संख्या 39 में 2 डिसमिल भूमि और दाखिल-खारिज वाद संख्या 2957/2025-26 के तहत, खाता संख्या 428, खेसरा संख्या 36 में 5 डिसमिल भूमि का दाखिल-खारिज किया गया। आरोप है कि यह पूरा खेल दूसरे अंचल के ऑपरेटर और एक राजस्व अधिकारी की मिलीभगत से किया गया।

गैर मजरूआ जमीन का दाखिल खारिज

जगदीशपुर के अंचलाधिकारी सतीश कुमार ने कहा कि यदि गैर-मजरूआ जमीन का दाखिल-खारिज हुआ है तो मामले को अपील में भेजा जाएगा और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोप है कि कई अंचलों का काम ऑपरेटरों और राजस्व अधिकारियों के निजी आवास से संचालित हो रहा है।

अधिकारियों की मिली भगत से बड़ा खेल 

जगदीशपुर अंचल में दाखिल-खारिज और परिमार्जन का कार्य ज्योति विहार कॉलोनी, जीरोमाइल (भागलपुर) स्थित एक निजी आवास से किया गया। जहां ऑपरेटर द्वारा अंचलाधिकारी का डोंगल इस्तेमाल किया गया। जबकि स्पष्ट निर्देश हैं कि यह कार्य केवल सरकारी कार्यालय परिसर में उपस्थित होकर किया जाना चाहिए।

पैसे नहीं देने पर आवेदन रिजेक्ट करने का आरोप

सूत्रों के अनुसार निजी स्वार्थ पूरा नहीं होने पर वादों को ऑब्जेक्शन में डाल दिया जाता है या फिर आवेदन रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। एक मोबाइल नंबर के जरिए ऑनलाइन पैसे लेने की भी चर्चा है। ऑपरेटर द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की भी बातें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान पहले भी इस तरह की गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद तत्कालीन अंचलाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया था। अब इस ताजा मामले के सामने आने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।