राष्ट्रीय लोक अदालत का न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों ने किया उद्घाटन; कुल 31 बेंचों पर हुई सुनवाई

भागलपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन- फोटो : बाल मुकुंद कुमार

Bhagalpur : जिले में इस वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का शनिवार को शानदार आगाज हुआ। भागलपुर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिला एवं सत्र न्यायाधीश राज कुमार राजपूत, प्रिंसिपल जज दीपंकर पांडे, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) आनंद कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर भारी संख्या में न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और फरियादी उपस्थित रहे, जिससे पूरा न्यायालय परिसर सुबह से ही गुलजार नजर आया।


प्रिंसिपल जज दीपंकर पांडे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय प्रदान करना है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण पहल की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार आम लोगों की सहूलियत के लिए जिला स्कूल में ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों के निष्पादन हेतु विशेष बेंच लगाया गया है। यह पहली बार है जब ट्रैफिक चालान के लिए अलग से व्यवस्था की गई है, ताकि मुख्य न्यायालय परिसर में भीड़ कम हो और लोगों के चालान का निपटारा शीघ्रता से हो सके।


राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिले भर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भागलपुर व्यवहार न्यायालय में कुल 22 बेंच बनाए गए हैं, जबकि नवगछिया अनुमंडल में 7 और कहलगांव में 2 बेंचों का गठन किया गया है। इन सभी बेंचों पर सुलहनीय प्रकृति के मामलों की सुनवाई हो रही है। सुबह से ही विभिन्न प्रखंडों से आए लोग अपने पुराने विवादों को सुलझाने के लिए संबंधित बेंचों पर पहुंच रहे हैं, जहां आपसी सहमति के आधार पर फाइलों का निष्पादन किया जा रहा है।


इस लोक अदालत में मुख्य रूप से बैंक ऋण से जुड़े विवाद, बिजली बिल की बकाया राशि, पारिवारिक कलह, मोटर दुर्घटना दावा (MACT), श्रम विवाद और ट्रैफिक चालान जैसे हजारों मामलों को सूचीबद्ध किया गया है। जिलाधिकारी और एसएसपी ने भी लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने लंबित मामलों का आपसी समझौते से अंत करें, क्योंकि लोक अदालत में हुए फैसले न केवल अंतिम होते हैं बल्कि इससे दोनों पक्षों के बीच भविष्य के लिए मधुर संबंध भी बने रहते हैं।


आयोजन के दौरान न्यायालय परिसर में विधिक सहायता केंद्र भी सक्रिय दिखे, जहाँ लोगों को उनके केस से जुड़ी जानकारियां और कानूनी सलाह दी जा रही थी। अधिकारियों का मानना है कि इस बार रिकॉर्ड तोड़ मामलों के निष्पादन की उम्मीद है, जिससे अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ काफी कम होगा। लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि बिना किसी लंबी अदालती कार्रवाई के एक ही छत के नीचे मामलों का निपटारा होना राहत की बात है।


बालमुकुंद की रिपोर्ट