Bihar News: सुल्तानगंज ने नम आंखों से दी चेयरमैन को विदाई, राजकुमार गुड्डू की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

Bihar News: नगर परिषद के लोकप्रिय चेयरमैन राजकुमार गुड्डू का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया तो हर गली, हर मोहल्ला मातम में बदल गया।...

नम आंखों से दी चेयरमैन को विदाई- फोटो : reporter

Bihar News: भागलपुर जिले का सुल्तानगंज आज एक गहरे शोक में डूब गया। नगर परिषद के लोकप्रिय चेयरमैन राजकुमार गुड्डू के निधन की खबर ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया, और जब उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया तो हर गली, हर मोहल्ला मातम में बदल गया।

राजकुमार गुड्डू का निधन 12 दिनों के इलाज के बाद पटना में हुआ था। रविवार सुबह जब उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो ऐसा लगा मानो पूरा शहर अपने किसी अपने को खो बैठा हो। लोग घरों से निकल आए, आंखों में आंसू, दिल में दर्द और जुबां पर सिर्फ एक ही नाम-गुड्डू जी।

उनकी अंतिम यात्रा उनके आवास से शुरू होकर चौक बाजार, संत संग मंदिर, मिठाई दुकान और सब्जी मंडी से होते हुए नमामि गंगा घाट, सुल्तानगंज तक पहुंची। रास्ते भर लोगों ने फूल बरसाकर अपने प्रिय नेता को विदाई दी। भीड़ इतनी उमड़ी कि सड़कें जनसैलाब में बदल गईं।

हर कदम पर गूंजते रहे “राजकुमार गुड्डू अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारे, जिसने पूरे शहर को भावनाओं से भर दिया। हजारों लोग उनके कंधे को सहारा देकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए, जैसे कोई अपना बड़ा परिवार का सदस्य जा रहा हो।

गंगा घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके बड़े पुत्र ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। यह क्षण इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं और पूरा वातावरण मौन हो गया। अंतिम यात्रा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और धार्मिक संगठनों की भारी भागीदारी रही। अजगैविनाथ मंदिर के महंत प्रेमानंद गिरी, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष टुनटुन साह और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई, जिसमें प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा और इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार सहित पुलिस बल तैनात रहा।

राजकुमार गुड्डू केवल एक चेयरमैन नहीं थे, बल्कि लोगों के दिलों में बसने वाला एक चेहरा थे—जो हर किसी की बात सुनते थे, हर दुख में साथ खड़े रहते थे। उनकी सादगी, सहजता और जनता से गहरा जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। आज सुल्तानगंज की गलियों में सिर्फ एक ही एहसास गूंज रहा है एक ऐसा नेता चला गया, जो जनता के बीच रहकर जनता का ही बन गया था। लोग बस यही कहते नजर आए-“ऐसे जनप्रतिनिधि बार-बार नहीं मिलते…”

रिपोर्ट – अंजनी कुमार कश्यप