Bihar Sultanpur Shooting Case: गोलीकांड के 12 दिन बाद इलाज के दौरान सुल्तानगंज सभापति राजकुमार गुड्डू का निधन,पटना अस्पताल में ली अंतिम सांस, इलाके में गम और गुस्से का सैलाब

Bihar Sultanpur Shooting Case: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए जानलेवा गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल सभापति राजकुमार गुड्डू ने आखिरकार 12 दिन तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद दम तोड़ दिया।

इलाज के दौरान सुल्तानगंज सभापति का निधन- फोटो : reporter

Bihar Sultanpur Shooting Case: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक और आक्रोश में डुबो दिया है। नगर परिषद कार्यालय में हुए जानलेवा गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल सभापति राजकुमार गुड्डू ने आखिरकार 12 दिन तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद दम तोड़ दिया। उनका इलाज पटना के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां शनिवार 9 मई को उन्होंने अंतिम सांस ली।

जानकारी के अनुसार, गोलीबारी की घटना के दौरान उनके शरीर में दो गोलियां फंसी रह गई थीं, जिससे उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें स्थिर करने की कोशिश करती रही, लेकिन गंभीर चोटों के कारण 11 दिन तक उनका ऑपरेशन भी संभव नहीं हो सका। अंततः संघर्ष हार गया और एक जनप्रतिनिधि की जिंदगी थम गई।

इस दुखद खबर के फैलते ही सुल्तानगंज और भागलपुर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। नगर परिषद कार्यालय से लेकर उनके आवास तक मातम पसरा हुआ है। हर तरफ सन्नाटा और आंसुओं का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा इलाका गहरे सदमे में डूबा है।

घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब एक जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की स्थिति क्या होगी। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त से सख्त सजा की मांग की है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस घटना को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि नगर परिषद कार्यालय जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इतनी बड़ी वारदात कैसे हो गई।

राजकुमार गुड्डू के निधन के बाद पूरे क्षेत्र में श्रद्धांजलि सभाओं का दौर शुरू हो गया है। उनके समर्थक और स्थानीय लोग लगातार उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं। हर आंख नम है और हर जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है आखिर सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों हो गई?

बता दें  भागलपुर जिले में 28 अप्रैल 2026 को जो कुछ हुआ, उसने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया था। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय उस दिन अचानक गोलियों की गूंज से दहल उठा, जब दिनदहाड़े अपराधियों ने अंदर घुसकर सभापति और कार्यपालक अधिकारी (ईओ) पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस सनसनीखेज वारदात में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सभापति राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गोली लगने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत बेहद नाजुक बनी रही।आज उन्होंने अंतिम सांस ली । यह हमला केवल एक हत्या नहीं था, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की सुरक्षा पर सीधा सवाल था। नगर परिषद कार्यालय, जहां जनता के काम होते हैं, वहां इस तरह का खुला गोलीकांड पूरे बिहार में चर्चा और दहशत का विषय बन गया। लोग हैरान थे कि आखिर दिनदहाड़े सरकारी दफ्तर में अपराधी कैसे घुस आए और इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक बड़े आपराधिक नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं। पुलिस ने जब इस मामले में तेजी दिखाई, तो मुख्य आरोपी कुख्यात अपराधी रामधनी यादव तक पहुंचने में सफलता मिली। महज 12 घंटे के भीतर ही बिहार पुलिस ने यूपी स्टाइल में बड़ा एक्शन लेते हुए उसे मुठभेड़ में ढेर कर दिया।

पुलिस कार्रवाई में रामधनी यादव मौके पर ही मारा गया, जबकि उसका एक अन्य साथी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। इस एनकाउंटर के बाद पूरे इलाके में खौफ और सन्नाटा पसर गया, वहीं पुलिस ने इसे अपराध के खिलाफ सख्त संदेश बताया। इस पूरी घटना ने एक तरफ जहां प्रशासनिक तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ किया कि अब अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और अधिक कठोर रुख में की जा रही है। सुल्तानगंज का यह गोलीकांड और उसके बाद हुआ एनकाउंटर अब बिहार की सबसे चर्चित और भयावह घटनाओं में से एक बन चुका है।

रिपोर्ट- अंजनी कुमार कश्यप