विक्रमशिला बेली ब्रिज पर रात के अंधेरे में ओवरलोड वाहनों का 'खेल': उड़ रही नियमों की धज्जियां, बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु के समानांतर बने बेली ब्रिज की सुरक्षा पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गाइडलाइंस को ताक पर रखकर इस सीमित क्षमता वाले पुल सेरात के सन्नाटे में भारी और ओवरलोड वाहनों का अवैध परिचालन धड़ल्ले से हो रहा
Bhagalpur : जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के समानांतर बने बेली ब्रिज की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। विभागीय और प्रशासनिक नियमों के अनुसार, इस पुल से केवल और केवल निर्धारित क्षमता (लाइट व्हीकल्स) वाले वाहनों के परिचालन की ही अनुमति दी गई है। लेकिन स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि दिन के उजाले में तो नियम दिखाई देते हैं, मगर देर रात होते ही इस पुल पर ओवरलोड और भारी वाहनों की अवैध आवाजाही धड़ल्ले से शुरू हो जाती है।
रात के अंधेरे में किसकी शह पर खुलता है 'नो-एंट्री' का खेल?
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर और अनुत्तरित सवाल यह है कि आखिर रात के सन्नाटे में इन भारी और ओवरलोड वाहनों को पुल पर प्रवेश कौन दिला रहा है? पुल के दोनों छोरों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के दावों के बावजूद ये गाड़ियां धड़ल्ले से कैसे पार हो रही हैं? क्या संबंधित विभाग, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन इस पूरे खेल से अनजान हैं, या फिर सब कुछ जानते हुए भी 'अंधेरे के इस सिंडिकेट' को मूक सहमति दी जा रही है? यह सवाल अब पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
पुल की सेहत और जनता की जान पर मंडराया बड़ा खतरा
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का स्पष्ट कहना है कि बेली ब्रिज एक वैकल्पिक और सीमित क्षमता वाला ढांचा (स्ट्रक्चर) होता है। यदि इस पर लगातार क्षमता से अधिक वजनी और ओवरलोड वाहनों का दबाव बना रहा, तो पुल के किसी भी हिस्से के ढहने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। दिन के समय हजारों लोग इस पुल से गुजरते हैं; ऐसे में रात के वक्त चंद रुपयों के लालच या लापरवाही की वजह से अगर पुल को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी भारी कीमत भागलपुर और नवगछिया की जनता को चुकानी पड़ेगी।
प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी, जनता में गहरा रहा आक्रोश
इस गंभीर लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है। हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर पर इस अवैध परिचालन की लगातार चर्चा हो रही है, लेकिन प्रशासन या संबंधित निर्माण एजेंसी की ओर से अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट बयान या कार्रवाई सामने नहीं आई है। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी इलाके में चल रहे साठगांठ के दावों को और अधिक हवा दे रही है।
सवाल जनता का है: आखिर किसके संरक्षण में पार हो रहे हैं वाहन?
अब गेंद पूरी तरह से भागलपुर जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के पाले में है। देखना होगा कि उच्च अधिकारी इन गंभीर आरोपों को कितना गंभीरता से लेते हैं और रात के समय पुल पर विशेष चेकिंग अभियान चलाकर इस अवैध धंधे को कब तक बंद कराते हैं। सवाल सीधा और साफ है— "जब नियम ओवरलोड वाहनों को रोकने के लिए बने हैं, तो फिर रात के अंधेरे में ये मौत के सौदागर वाहन आखिर किसके संरक्षण में बेली ब्रिज पार कर रहे हैं?"
धीरज परासर की रिपोर्ट