गंडामन मिड डे मील त्रासदी की 13वीं बरसी: 23 मासूमों को नम आंखों से दी श्रद्धांजलि, प्रशासनिक दूरी से परिजनों में रोष

वर्ष 2013 में छपरा जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत गंडामन गांव में घटित हुई देश की सबसे दर्दनाक मिड डे मील घटना के आज 13 वर्ष पूरे हो गए। इस मौके पर उस घटना में अकाल मृत्यु का शिकार हुए 23 मासूम बच्चों को याद कर पूरे गांव की आंखें नम हो गईं...

गंडामन मिड डे मील त्रासदी की 13वीं बरसी- फोटो : धर्मेंन्द्र रस्तोगी

Chapra : बिहार के सारण (छपरा) जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत गंडामन गांव में वर्ष 2013 में घटित हुई देश की सबसे दर्दनाक मिड डे मील (मध्यान्ह भोजन) त्रासदी की 13वीं बरसी गुरुवार को बेहद गमगीन माहौल में मनाई गई। इस हादसे में अकाल मृत्यु का शिकार हुए 23 मासूम बच्चों को याद कर पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। मृत बच्चों के शोकाकुल परिजनों, स्थानीय ग्रामीणों, शिक्षकों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की, हवन किया और दो मिनट का मौन रखकर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


श्रद्धांजलि सभा में जनप्रतिनिधि और शिक्षक हुए शामिल

इस दुखद अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी आफताब आलम, प्रखंड प्रमुख रवि प्रकाश मंटू, नवसृजित विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुमारी लीलावती और माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार सिंह समेत कई शिक्षक और समाजसेवी मौजूद रहे। महाराजगंज सांसद के प्रतिनिधि बीरबल प्रसाद कुशवाहा ने भी मासूमों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि 16 जुलाई 2013 का वह भयावह काला दिन आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है, जब स्कूल का खाना खाने से इतने बच्चों की मौत हो गई थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि पीड़ित परिवारों की लंबित मांगों को लेकर जल्द ही सारण जिलाधिकारी (DM) को स्मार-पत्र सौंपा जाएगा।


कलेजे के टुकड़ों को याद कर रो पड़े माता-पिता

बरसी के दौरान अपने नौनिहालों को याद कर माता-पिता और परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और वे फूट-फूटकर रो पड़े। इस हादसे का दंश झेल रहे कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस भीषण त्रासदी में अपने एक से अधिक बच्चों को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया था। सिसकते हुए परिजनों ने कहा कि वे ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि जो असहनीय दर्द उन्होंने झेला है, वैसी त्रासदी का सामना भविष्य में दुनिया के किसी भी माता-पिता या परिवार को न करना पड़े।


सरकारी बेरुखी से परिजनों में भारी मायूसी और नाराजगी

इस भावुक क्षण के बीच जिला प्रशासन, स्थानीय सांसद और क्षेत्रीय विधायक की अनुपस्थिति को लेकर पीड़ित परिवारों में भारी मायूसी और तीखा आक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद कई प्रभावित परिवार सरकारी सहायता, पक्के आवास और अन्य सरकारी घोषणाओं के पूर्ण लाभ से अब तक वंचित हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से लंबित मुआवजा राशि का भुगतान करने, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने तथा बच्चों की समाधि स्थल से जुड़े मुद्दों का शीघ्र और स्थाई समाधान करने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है।


खाद्य सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग

श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित वक्ताओं और बुद्धिजीवियों ने सरकारी विद्यालयों में दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम के समापन पर वहां मौजूद सभी लोगों ने मृत बच्चों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित किए और संकल्प लिया कि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही या हृदयविदारक घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए वे हमेशा सजग और प्रयासरत रहेंगे।


धर्मेन्द्र की रिपोर्ट