Education News: सारण की शिक्षा व्यवस्था पर प्रशासनिक संकट, 9 प्रखंडों में BEO नहीं, गैर-विभागीय अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार

Bihar Education News: सारण जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रही है।...य

सारण की शिक्षा व्यवस्था पर प्रशासनिक संकट- फोटो : reporter

 Bihar Education News: सारण जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रही है। जिले के नौ प्रखंडों में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) के पद रिक्त होने के कारण शिक्षा विभाग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत अन्य विभागों के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। यह व्यवस्था नियमित नियुक्ति होने तक लागू रहेगी, लेकिन इससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी निशांत किरण द्वारा जारी आदेश के अनुसार—

छपरा सदर/नगर – ग्रामीण विकास पदाधिकारी बुशरा नावेद

जलालपुर – श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मुन्ना कुमार

तरैया – वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी संजय कुमार जायसवाल

पानापुर – प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी वीरेंद्र प्रसाद

बनियापुर – प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी ओम प्रकाश शर्मा

मकेर – प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी सुजीत कुमार

मढ़ौरा – श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी पूजा कुमारी

रिविलगंज – प्रखंड कृषि पदाधिकारी सुनील कुमार

सोनपुर – प्रखंड कल्याण पदाधिकारी तायकांत कुमार

इन सभी अधिकारियों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ वित्तीय अधिकार भी प्रदान किए गए हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने आदेश में कहा है कि सभी अधिकारी तत्काल संबंधित प्रखंड में योगदान देकर प्रभार ग्रहण करें और इसकी सूचना जिला शिक्षा कार्यालय को दें। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक रिक्त पदों पर नियमित बीईओ की नियुक्ति नहीं हो जाती।

हालांकि शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है। जिन अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, वे पहले से ही अपने-अपने विभागों के कार्यों में व्यस्त हैं। ऐसे में विद्यालयों का नियमित निरीक्षण, शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी, शैक्षणिक गुणवत्ता का मूल्यांकन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायतों के त्वरित निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि एक अधिकारी को दो-दो विभागों की जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी तो दोनों ही विभागों के कार्य प्रभावित होंगे। जिले के कई सरकारी विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और शैक्षणिक गुणवत्ता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

ऐसे में नौ प्रखंडों में नियमित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के बजाय अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर कर सकती है। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा विभाग के रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियमित नियुक्तियां की जाएं, ताकि विद्यालयों की मॉनिटरिंग प्रभावी हो और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

रिपोर्ट- धर्मेंद्र कुमार