डिजिटल होगा सारण का स्वास्थ्य विभाग: ऑनलाइन बनेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, हीट वेव से निपटने के लिए अस्पतालों में बनेंगे स्पेशल वार्ड
सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले के सभी अस्पतालों में अब ऑफलाइन इंजुरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद की जाए।
सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले के सभी अस्पतालों में अब ऑफलाइन इंजुरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद की जाए। वर्तमान में जिले में 87 प्रतिशत इंजुरी रिपोर्ट ऑनलाइन बनाई जा रही है, जिसे शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। समीक्षा में पाया गया कि नगरा प्रखंड की स्थिति सबसे खराब है, जहां मात्र 31 प्रतिशत रिपोर्ट ही ऑनलाइन है, वहीं रिविलगंज में यह आंकड़ा 54 प्रतिशत है। जिलाधिकारी ने इन क्षेत्रों में तत्काल सुधार लाने और डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह अपनाने का आदेश दिया है।
डॉक्टरों की उपस्थिति और ओपीडी में सुधार के निर्देश
अस्पतालों में डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बायोमेट्रिक डिवाइस के सामने सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपस्थिति दर्ज करते समय की फुटेज कैप्चर हो सके। इसके अलावा, ओपीडी में मरीजों का औसत प्रतीक्षा समय 30 मिनट पाया गया, जिसे कम करने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने पिछले 3 महीनों में लगातार विलंब से आने वाले और ओपीडी में सबसे कम मरीज देखने वाले टॉप-10 डॉक्टरों को चिन्हित कर उन पर कार्रवाई करने का प्रस्ताव मांगा है।
टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
जिले में रूटीन टीकाकरण की औसत उपलब्धि 91 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसे और बेहतर बनाने के लिए आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समन्वय से 'ड्यू लिस्ट' तैयार करने को कहा गया है। संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) की संख्या बढ़ाने के लिए एएनएम और जीएनएम की युक्तिसंगत तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, परिवार नियोजन के तहत महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया गया है। बैठक में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन अभियान के तहत संदिग्ध मरीजों की पहचान और उपचार में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए।
हीट वेव और दवाओं की उपलब्धता की तैयारी
आगामी गर्मियों और लू (हीट वेव) के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी अस्पतालों में मानक के अनुरूप 'डेडिकेटेड वार्ड' तैयार करने का आदेश दिया है। दवाओं की स्थिति की समीक्षा में पाया गया कि अस्पतालों में 91 प्रतिशत से अधिक आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। सभी चिकित्सा प्रभारियों (MOIC) को निर्देश दिया गया है कि वे दवाओं की मांग (Indent) समय रहते भेजें ताकि स्टॉक कभी खत्म न हो। इस उच्च स्तरीय बैठक में सिविल सर्जन सहित जिले के सभी प्रमुख चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड स्तरीय प्रबंधक उपस्थित थे।
रिपोर्ट - संजय भारद्वाज, छपरा