Bihar News : कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोये पूर्व मंत्री और राजद नेता शिवचंद्र राम, पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा, कहा-नेतृत्व ने दिया धोखा

Bihar News : कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोये पूर्व मंत्री और र
शिवचंद्र राम ने दिया इस्तीफा - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार विधान परिषद् के लिए 9 सीटों पर होनेवाले चुनाव को लेकर एनडीए ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। वहीँ राजद ने एक सीट के लिए सुनील सिंह का नाम तय कर दिया है। हालाँकि इस मामले को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रहा है। नाराज होकर राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और आरजेडी के सभी पदों  से अलग होने का आधिकारिक तौर पर ऐलान किया। शिवचंद्र राम का पार्टी में पद छोड़ना राजद के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व मंत्री बेहद भावुक नजर आए और मीडिया के सामने ही फूट-फूट कर रोने लगे। उन्होंने रूंधे गले से रुमाल से अपने आंसू पोंछते हुए कहा, "पिछले तीन-चार दिनों से मैंने अपनी जिंदगी के सबसे कड़े और दर्दनाक पल बिताए हैं। भगवान न करे कि ऐसी जिंदगी किसी और को देखनी पड़े। मैं पिछले चार दिनों से रात को सो तक नहीं पाया हूँ।"

अपनी वफादारी का जिक्र करते हुए शिवचंद्र राम ने कहा कि वे साल 1990 से ही राष्ट्रीय जनता दल के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने हमेशा लालू प्रसाद यादव के 'सामाजिक न्याय' और तेजस्वी यादव के 'आर्थिक न्याय' की विचारधारा को धरातल पर पूरी मजबूती के साथ उतारने का काम किया। उन्होंने खुद को पार्टी का एक मजदूर और दरबारी बताते हुए कहा कि नेतृत्व ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया, जिसके लिए वे पार्टी के शीर्ष नेताओं के आभारी हैं।

इस्तीफे की मुख्य वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर उनके साथ भारी नाइंसाफी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ हुए इस अन्याय से बिहार के करोड़ों गरीब, दबे-कुचले, दलित और अति पिछड़े समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि उनके समर्थक पूरे बिहार से पटना आकर होटलों में बैठे हैं और वे सब इस फैसले से बेहद दुखी और आक्रोशित हैं।

शिवचंद्र राम ने आगे कहा कि वे बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर, संत रविदास, वीर चोहरमल, गाडगे बाबा और बिरसा मुंडा जैसी महान विभूतियों के विचारों को मानने वाले बहुजन समाज के नेता हैं। अब उनका मुख्य उद्देश्य उन समर्थकों और शोषित वर्ग के लोगों का सम्मान वापस लौटाना है, जो हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने समाज के लोगों को फिर से 'बूस्ट अप' करने के लिए यह कड़ा कदम उठा रहे हैं।