Darbhanga Airport: दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल बनेगा मिथिला की पहचान का आईना, संजय झा ने किया निरीक्षण कर बताया सरकार का प्लान
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दरभंगा एयरपोर्ट पहुंचकर नए टर्मिनल भवन और यात्री सुविधाओं का स्थल निरीक्षण किया।
Darbhanga: एयरपोर्ट के निर्माणाधीन नए टर्मिनल भवन में अब आधुनिक सुविधाओं के साथ मिथिला की संस्कृति और विरासत की भी झलक दिखाई देगी। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दरभंगा एयरपोर्ट पहुंचकर नए टर्मिनल भवन और यात्री सुविधाओं का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और बचे हुए काम को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।
करीब 643 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस नए टर्मिनल भवन का निर्माण लगभग 62,800 वर्गमीटर क्षेत्र में किया जा रहा है। टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता करीब 30 लाख होगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस टर्मिनल में 5 एयरोब्रिज और 40 चेक-इन काउंटर समेत यात्रियों की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।निरीक्षण के दौरान संजय झा ने निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों से टर्मिनल के अलग-अलग हिस्सों की जानकारी ली। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता, यात्री सुविधाओं और शेष कार्यों की प्रगति को लेकर भी जरूरी निर्देश दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि उत्तर बिहार के लोगों को आधुनिक एयर कनेक्टिविटी का बेहतर लाभ मिल सके।
लेकिन इस निरीक्षण का सबसे अहम पहलू सिर्फ निर्माण की रफ्तार नहीं, बल्कि नए टर्मिनल की पहचान को लेकर दिया गया निर्देश रहा। संजय झा ने अधिकारियों से कहा कि टर्मिनल के फ्रंट, इंटीरियर और बाहरी सज्जा में मिथिला की कला, संस्कृति और पारंपरिक कलाकृतियों को प्रमुखता दी जाए।उनका कहना था कि दरभंगा एयरपोर्ट सिर्फ आने-जाने का केंद्र नहीं होना चाहिए, बल्कि यहां पहुंचने वाले यात्रियों को पहली नजर में ही मिथिला की सांस्कृतिक पहचान महसूस होनी चाहिए। एयरपोर्ट की डिजाइन और सजावट में स्थानीय कला को जगह मिलने से यह टर्मिनल आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़ा दिखाई देगा।
मिथिला पेंटिंग, पारंपरिक कलाकृतियों और स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को नए टर्मिनल की साज-सज्जा में शामिल किए जाने की पहल क्षेत्रीय पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। दरभंगा और आसपास के इलाकों के लिए यह पहल पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।संजय झा ने नए टर्मिनल को उत्तर बिहार के लोगों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ मिथिला की पहचान को भी यहां प्रमुखता मिलनी चाहिए। इससे दरभंगा एयरपोर्ट आने वाले यात्रियों के लिए यह अनुभव सिर्फ हवाई यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मिथिला की कला और संस्कृति से परिचय का अवसर भी बनेगा।
करीब 30 लाख यात्रियों की वार्षिक क्षमता वाला नया टर्मिनल दरभंगा एयरपोर्ट की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। पांच एयरोब्रिज और 40 चेक-इन काउंटर जैसी सुविधाओं के साथ यह टर्मिनल उत्तर बिहार की एयर कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अब निगाहें निर्माण कार्य की रफ्तार और टर्मिनल की अंतिम साज-सज्जा पर हैं। अगर योजना के मुताबिक मिथिला की कला और विरासत को खूबसूरती से जगह मिलती है, तो दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल आधुनिक सुविधा के साथ क्षेत्रीय अस्मिता का भी नया प्रतीक बन सकता है।
रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर