Gaya Pitru Paksha: सात समंदर पार से गया पहुंचे पितरों के श्रद्धालु, फ्रांस-रूस-जर्मनी के 19 विदेशियों ने किया पिंडदान
Gaya Pitru Paksha: गया जी में चल रहे विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। ...
Gaya Pitru Paksha: गया जी में चल रहे विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में सात समंदर पार से आए विदेशी श्रद्धालुओं का 19 सदस्यीय जत्था गया पहुंचा, जहां उन्होंने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए फल्गु नदी के पावन तट स्थित देवघाट पर विधि-विधान के साथ पिंडदान और तर्पण किया।
इस दौरान फ्रांस, रूस और जर्मनी से आए श्रद्धालुओं ने गया जी की धार्मिक परंपराओं के मुताबिक अपने पितरों का स्मरण किया। देवघाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विदेशी श्रद्धालुओं ने पिंड अर्पित किए और तर्पण की रस्म पूरी की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विदेशी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा-पाठ में शामिल नजर आए।
गया जी की धरती पर पितृपक्ष के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करने पहुंचते हैं। इस बार फ्रांस, रूस और जर्मनी से पहुंचे 19 सदस्यीय विदेशी श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी गया की इस प्राचीन धार्मिक परंपरा में हिस्सा लिया।
फल्गु नदी के तट पर धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए पिंड अर्पित किए और उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की। इस दौरान देवघाट का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक नजर आया।विदेशी श्रद्धालुओं ने स्थानीय धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के मुताबिक अनुष्ठान को पूरा किया। पिंडदान और तर्पण के दौरान उन्होंने अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट की और उनके मोक्ष की कामना की।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में गया जी में पितृपक्ष के दौरान किए जाने वाले पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते पितृपक्ष के दौरान गया में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा होता है।देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग यहां पहुंचकर अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण करते हैं। गया की धार्मिक परंपरा सदियों से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है।
फ्रांस, रूस और जर्मनी से आए श्रद्धालुओं के इस जत्थे ने गया जी की परंपरा के मुताबिक पूरे विधि-विधान से अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म किया। देवघाट पर पिंडदान और तर्पण के दौरान उनके चेहरे पर श्रद्धा और भावुकता साफ नजर आई।सात समंदर पार से गया पहुंचे इन विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि गया जी की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। पितृपक्ष के दौरान यहां देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने पहुंचते हैं।गया जी के देवघाट पर विदेशी श्रद्धालुओं द्वारा किया गया पिंडदान इस बार पितृपक्ष मेले में आस्था, परंपरा और वैश्विक जुड़ाव का एक खास दृश्य बन गया।
रिपोर्ट- मनोज कुमार