Bihar News : गयाजी में 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान, सुविधाओं से गदगद हुए रूस, फ्रांस और जर्मनी के तीर्थयात्री; मिला गंगाजल और कॉफी टेबल बुक का उपहार
Bihar News : रूस, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्राजील और यूक्रेन समेत विभिन्न देशों से आए 22 विदेशी पिंडदानियों ने विष्णुपद मंदिर, प्रेतशिला एवं अक्षयवट जैसे प्रमुख स्थलों पर अपने पितरों का पिंडदान और तर्पण किया
GAYAJI : पितृपक्ष मेला 2026 के अवसर पर गया जी की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु भी गया पहुंचे हैं। इसी क्रम में रूस, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्राजील, यूक्रेन सहित विभिन्न देशों से आए 22 विदेशी पिंडदानियों ने आज गया जी में अपने पितरों का पिंडदान एवं तर्पण करने के पश्चात जिला प्रशासन गया के पदाधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। विदेशी पिंडदानियों ने गया जी में उपलब्ध व्यवस्थाओं, धार्मिक स्थलों की व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता एवं श्रद्धालुओं के सहयोग के लिए किए गए प्रशासनिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गया जी आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद मेला क्षेत्र में व्यवस्थाएं व्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। विदेशी श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने विष्णुपद मंदिर, प्रेतशिला एवं अक्षयवट सहित विभिन्न महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों पर जाकर अपने पितरों का तर्पण एवं पिंडदान किया। इन सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने भीड़ प्रबंधन एवं यातायात व्यवस्था को भी उत्कृष्ट बताते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के प्रयासों की प्रशंसा की।
धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि
उन्होंने यह भी कहा कि पितृपक्ष मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, परंपरा, आध्यात्मिकता एवं अतिथि सत्कार को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। गया जी में आने के बाद उन्हें यहां की संस्कृति और स्थानीय लोगों के व्यवहार को करीब से जानने और समझने का अवसर मिला, जो उनके लिए अत्यंत सुखद अनुभव रहा। विदेशी पिंडदानियों ने बताया कि मेला क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य भी श्रद्धालुओं की सहायता में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिल रही है।
राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना
इस अवसर पर सहायक समाहर्ता नितेश गोयल ने कहा कि पितृपक्ष मेला लगभग 15 दिनों तक चलने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री गया जी पहुंचकर अपने पूर्वजों का तर्पण एवं पिंडदान करते हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री द्वारा पितृपक्ष मेला की व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा एवं मॉनिटरिंग की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा भी मेला क्षेत्र के प्रत्येक महत्वपूर्ण सेक्टर पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल सुविधा, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा, खोया-पाया एवं श्रद्धालुओं की सहायता सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। विभिन्न स्थानों पर तैनात पदाधिकारी एवं कर्मी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके।
गंगाजल एवं कॉफी टेबल बुक भेंट कर विदेशी अतिथियों का सम्मान
सहायक समाहर्ता नितेश गोयल द्वारा विदेशी पिंडदानियों को गंगाजल एवं गया-बोधगया की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को दर्शाने वाली कॉफी टेबल बुक भेंट स्वरूप प्रदान की गई। यह उपहार गया जी की संस्कृति, परंपरा एवं आध्यात्मिक महत्व की स्मृति के रूप में विदेशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विदेशी पिंडदानियों ने गया जी की संस्कृति एवं यहां की व्यवस्थाओं को देखकर खुशी एवं उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गया जी में उन्हें जो अनुभव प्राप्त हुआ है, उसे वे अपने-अपने देशों में साझा करेंगे तथा गया जी की आध्यात्मिक परंपरा, भारतीय संस्कृति और यहां की बेहतर व्यवस्थाओं के बारे में लोगों को बताएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि गया जी का पितृपक्ष मेला विश्वभर के लोगों को भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं एवं संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। उनके अनुसार, गया जी की आध्यात्मिक शांति, धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्रशासनिक व्यवस्थाएं इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनाती हैं। विदेशी श्रद्धालुओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह संदेश भी सामने आया कि गया जी केवल पिंडदान और धार्मिक आस्था का वैश्विक केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। जिला प्रशासन गया द्वारा पितृपक्ष मेला के माध्यम से “अतिथि देवो भवः” की भावना के अनुरूप देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है, जिससे गया एवं बिहार की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिल रही है।
मनोज की रिपोर्ट