गया DTO ऑफिस में गुंडाराज: लाइसेंस मांगने पर युवक को पीटा, ₹40 हजार और मोबाइल लूटा, FIR दर्ज
बिहार के गया DTO कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया पूछने पर युवक की बेरहमी से पिटाई। बड़ा बाबू श्रवण कुमार, प्रोग्रामर रूही और रघुवीर पर ₹40 हजार लूटने और मोबाइल छीनने का आरोप। चंदौती थाने में FIR दर्ज।
सोचिए, आप अपने हक का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने किसी सरकारी दफ्तर जाएं और वहां का मुख्य लिपिक यानी "बड़ा बाबू" आपको घूरकर कहे कि बिना पैसे के यहाँ पत्ता भी नहीं हिलता। जब आप इस खुले भ्रष्टाचार का विरोध करें, तो आपको दफ्तर के अंदर बंद करके पीटा जाए, आपका मोबाइल छीन लिया जाए और आपकी जेब में रखे ₹40,000 भी गायब हो जाएं। यह किसी बॉलीवुड फिल्म का स्क्रिप्टेड सीन नहीं, बल्कि गया जिला परिवहन कार्यालय (DTO) का कड़वा सच है, जो अब चंदौती थाने की एफआईआर में दर्ज हो चुका है।
लाइसेंस की प्रक्रिया पूछने पर 'टॉर्चर चैंबर' बना सरकारी दफ्तर
घटना बीते 11 मई की सुबह करीब 9:10 बजे की है। निंदासरांज थाना क्षेत्र के नीघरिया गांव के रहने वाले रूपेश कुमार गया DTO कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सामान्य प्रक्रिया पूछने गए थे। वहां मौजूद बड़ा बाबू श्रवण कुमार को एक आम नागरिक का सीधे सवाल पूछना नागवार गुजरा। उन्होंने आव देखा न ताव, सीधे गालियां देनी शुरू कर दीं और धमकी भरे लहजे में कहा कि बिना मोटी रकम दिए लाइसेंस नहीं बनेगा। जब रूपेश ने इस अवैध वसूली का विरोध किया, तो सरकारी दफ्तर पल भर में टॉर्चर चैंबर में तब्दील हो गया।
बड़ा बाबू, प्रोग्रामर और सिपहसालार ने मिलकर की लूटपाट और मारपीट
विरोध बढ़ता देख लिपिक श्रवण कुमार ने सबसे पहले रूपेश के हाथ से उनका वीवो (Vivo) मोबाइल छीन लिया। जब पीड़ित ने अपना फोन वापस मांगा, तो बड़ा बाबू ने अपने गुर्गों—रघुवीर और विभाग की प्रोग्रामर रूही को आवाज देकर अंदर बुला लिया। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, इन तीनों ने मिलकर रूपेश को बेरहमी से मारना-पीटना शुरू कर दिया और जान से मारने की नीयत से उनका गला तक दबाया। इसी अफरा-तफरी के बीच रघुवीर ने रूपेश की जेब में रखे टैक्स जमा करने के ₹40,000 निकाल लिए, जबकि प्रोग्रामर रूही पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित का हाथ पकड़ रखा था ताकि लूट की वारदात को आसानी से अंजाम दिया जा सके।
चीख-पुकार सुनकर भागे आरोपी, चंदौती थाने में दर्ज हुआ मामला
गला दबाए जाने के कारण जब रूपेश की चीख दफ्तर से बाहर आई और परिसर में हंगामा बढ़ने लगा, तो आरोपी बड़ा बाबू, प्रोग्रामर और उनका सहयोगी मौके से भाग खड़े हुए। पीड़ित रूपेश कुमार इस खौफनाक आपबीती के तुरंत बाद सीधे चंदौती थाना पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 मई 2026 को कांड संख्या 170/26 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले में मारपीट, जबरन वसूली और मोबाइल छीनने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं और जांच का जिम्मा एएसआई (ASI) भागीरथी पासवान को सौंपा गया है।
सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल, रसूख के दम पर कार्रवाई से बचते रहे हैं 'बाबू'
गया का डीटीओ कार्यालय पहले से ही दलालों के सिंडिकेट और "सेटिंग" के खेल के लिए बदनाम रहा है, लेकिन अब अधिकारियों और कर्मियों की इस सरेआम गुंडई ने बिहार परिवहन विभाग को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ा बाबू श्रवण कुमार का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन विभाग में ऊंची पकड़ और रसूख के कारण उन पर कभी आंच नहीं आती। अब गया की जनता सीधा सवाल पूछ रही है कि सरेआम लूट और मारपीट की इस शर्मनाक घटना के बाद भी क्या ये दागी कर्मचारी अपनी कुर्सियों पर बने रहेंगे या सरकार इन पर कोई सख्त हंटर चलाएगी?
गया | धीरज पराशर, विशेष संवाददाता की रिपोर्ट