नदी की छाती छलनी, गांव का वजूद खतरे में!: बाराचट्टी में 18 फीट गहरे 'मौत के गड्ढे', 5000 पेड़ों पर चला बुलडोजर, डीएम की चौखट पर ग्रामीण

गया के बाराचट्टी में अवैध बालू खनन से 5 गांवों पर बाढ़ और कटाव का खतरा। ग्रामीणों ने डीएम से मिलकर लगाई रोक की गुहार। शवदाह स्थल तोड़ने का लगाया आरोप।

Gayaji - बिहार के गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड में बालू खनन ने विकराल रूप ले लिया है। मंझौली घाट के आसपास बसे मंझौली, खैरात गंगवार, सखोवा और कुंडल जैसे आधा दर्जन गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन विभाग की नाक के नीचे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बालू का अंधाधुंध उठाव अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की जिंदगी और मौत का सवाल बन गया है।

18 फीट गहरे गड्ढे: जल-जीवन-हरियाली पर भी चला 'बुलडोजर'

ग्रामीणों के अनुसार, खनन स्थल गांव से महज 50 मीटर की दूरी पर है। नियमों को ताक पर रखकर 15 से 18 फीट तक गहरी खुदाई की जा रही है। इन 'मौत के गड्ढों' में गिरकर अब तक कई मवेशियों और मासूमों की जान जा चुकी है। इतना ही नहीं, सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल-जीवन-हरियाली' योजना के तहत लगाए गए करीब 5 हजार पौधों को भी खनन माफियाओं ने मटियामेट कर दिया है। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लगाए गए पेड़ अब गहरे गड्ढों की भेंट चढ़ रहे हैं।

धार्मिक आस्था पर प्रहार: शवदाह स्थल को भी नहीं छोड़ा

खनन की आग अब ग्रामीणों की धार्मिक आस्था तक पहुँच गई है। आरोप है कि आसपास के पांच गांवों के लिए बने एकमात्र शवदाह स्थल को भी खनन की जद में लाकर तोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्वजों के अंतिम संस्कार की जगह को व्यापार के लिए नष्ट करना असहनीय है। जब ग्रामीण इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें रंगदारी और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

बाढ़ की आशंका से सहमे ग्रामीण, डीएम से लगाई गुहार

नदी के तल से अत्यधिक बालू निकाले जाने के कारण मानसून के दौरान गांवों में पानी घुसने और कटाव होने का खतरा बढ़ गया है। इसी समस्या को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण गया समाहरणालय पहुँचे और जिला पदाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि खनन पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई और दोषी संवेदकों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होंगे।

प्रशासनिक चुप्पी और भविष्य की चुनौती

फिलहाल जिला प्रशासन ने मामले की जांच का भरोसा दिया है, लेकिन ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे रहा है। बालू घाटों पर चल रही भारी मशीनों ने न केवल जमीन की छाती छलनी की है, बल्कि गांवों की सुरक्षा व्यवस्था को भी ध्वस्त कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन विकास के नाम पर हो रहे इस 'विनाश' को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

रिपोर्ट: मनोज कुमार, गया