Bihar News: अनुशासनात्मक कार्रवाई झेल चुके कर्मचारी को मिली अहम जिम्मेदारी, उठे कई सवाल, गया नगर निगम में पदस्थापन पर विवाद
Bihar News: गया नगर निगम में एक कर्मचारी को महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपे जाने के बाद निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
Bihar News: गया नगर निगम में एक कर्मचारी को महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपे जाने के बाद निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पूर्व में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके वार्ड निरीक्षक चंद्र मोहन को प्रभारी मुख्य सफाई निरीक्षक का दायित्व सौंप दिया गया है, जिससे निगम के निर्णय पर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, 4 जून 2026 को गया नगर निगम के वार्ड निरीक्षक सिंधु शेखर मिश्रा के साथ चंद्र मोहन की कथित रूप से फोन पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा में बातचीत का मामला सामने आया था। इस बातचीत का एक ऑडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया गया था। मामले का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त ने 5 जून 2026 को जारी आदेश (ज्ञापांक 1426) के माध्यम से चंद्र मोहन से स्पष्टीकरण मांगा था और उनके वेतन पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की थी।
इसके बावजूद आरोप है कि तत्कालीन नगर आयुक्त के स्थानांतरण के बाद चंद्र मोहन को प्रभारी मुख्य सफाई निरीक्षक की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस फैसले को लेकर नगर निगम की अनुशासनात्मक व्यवस्था, पदस्थापन प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई दर्ज हो, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के पीछे स्पष्ट कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
मामले को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि चंद्र मोहन के खिलाफ अभद्र व्यवहार की शिकायत पहली बार नहीं हुई है। आरोप है कि इससे पहले तत्कालीन स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार और चंदन कुमार के साथ भी उनके दुर्व्यवहार की लिखित शिकायतें की गई थीं, जिनसे संबंधित अभिलेख निगम कार्यालय में मौजूद हैं। इसके अलावा, महापौर गणेश पासवान के साथ उनके विवाद की भी चर्चा होती रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नगर निगम से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ पहले अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है और बाद में उसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपा जाता है, तो उसके पीछे के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता बनी रहेगी और आम लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।फिलहाल, इस पूरे मामले पर गया नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि निगम प्रशासन इस संबंध में अपना पक्ष या स्पष्टीकरण जारी करता है, तो उससे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट- मनोज कुमार