Bihar Dussehra 2026: 1957 से जारी है गया में रावण दहन की परंपरा, 3 पंजाबी परिवारों ने रखी थी नींव, गांधी मैदान में सुरक्षा का चाक-चौबंद इंतजाम
Bihar Dussehra 2026: गया शहर में दशहरे के अवसर पर होने वाला रावण दहन महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करीब सात दशक पुरानी परंपरा और सामाजिक एकजुटता की मिसाल है।..
Bihar Dussehra 2026: गया शहर में दशहरे के अवसर पर होने वाला रावण दहन महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करीब सात दशक पुरानी परंपरा और सामाजिक एकजुटता की मिसाल है। शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में वर्ष 1957 से रावण दहन का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत तीन पंजाबी परिवारों मंगलदास , भूषणदास और रामदास ने मिलकर की थी। वक्त के साथ इस आयोजन का दायरा बढ़ता गया और शहर के व्यवसायी वर्ग के लोग भी कमेटी से जुड़ते चले गए। आज यह कार्यक्रम गया के प्रमुख दशहरा आयोजनों में अपनी खास पहचान रखता है।
तीन पंजाबी परिवारों ने रखी थी परंपरा की नींव
रावण दहन कमेटी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1957 में तीन पंजाबी परिवारों ने इस आयोजन की शुरुआत की थी। उस दौर में शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा बन गई। समय बीतने के साथ कमेटी का विस्तार हुआ और कई अन्य लोग भी इससे जुड़ते गए।
आज विजयादशमी पर गांधी मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। कमेटी के सदस्यों ने जिलेवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए परिवार के साथ कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी आयोजन की तैयारियां की गई हैं, ताकि लोग उत्साह और उल्लास के साथ पर्व मना सकें।
गांधी मैदान में सुरक्षा का कड़ा पहरा, चप्पे-चप्पे पर नजर
रावण दहन कार्यक्रम के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। गया के वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार के मुताबिक, गांधी मैदान में बैरिकेडिंग, प्रवेश और निकास द्वार, सीसीटीवी कैमरे तथा पब्लिक एड्रेस सिस्टम की व्यवस्था की गई है।विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पदाधिकारियों, जवानों और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था उत्पन्न न हो और श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में दशहरा उत्सव का आनंद उठा सकें।
ट्रैफिक प्लान तैयार, असामाजिक तत्वों पर भी पुलिस की नजर
भीड़ के दबाव और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए विशेष यातायात योजना बनाई गई है। पुलिस असामाजिक तत्वों पर भी कड़ी निगरानी रखेगी। सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा बलों की तैनाती के जरिए आयोजन स्थल पर गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है।प्रशासन ने आम लोगों से यातायात नियमों का पालन करने, निर्धारित प्रवेश एवं निकास मार्गों का इस्तेमाल करने और सुरक्षा निर्देशों का अनुपालन करने की अपील की है। साथ ही लोगों से आयोजन को शांतिपूर्ण बनाने में सहयोग देने का आग्रह किया गया है।1957 में तीन पंजाबी परिवारों की पहल से शुरू हुई रावण दहन की यह परंपरा आज भी गया की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। इस बार भी आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन सतर्क है।
रिपोर्ट - मनोज कुमार