Bihar News ; गया में भगवान भोले के भक्त ने बनाई 30 फीट लंबी और डेढ क्विंटल वजनी कांवर, 30 बार डाक बम के रूप में जा चुके हैं देवघर, इस बार फिर जाएंगे बैजू धाम

डेढ़ क्विंटल वजनी कांवर- फोटो : MANOJ

GAYAJI : आज से सावन का पावन महीना शुरू हो गया. शिव भक्तों के 'बोल बम' के नारे गुंजायमान होने लगे. शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमङने लगी. भगवान भोलेनाथ के एक से बढ़कर एक भक्त हैं. इसी में सुदर्शन कुमार भी शामिल है, जो अपनी शिव भक्ति के लिए जाने जाते हैं. बिहार के गया में भगवान भोले के ये अनोखे भक्त हैं. ये 30 बार डाक बम के रूप में बाबा की नगरिया देवघर को जा चुके हैं. इस बार ये 30 फीट लंबी और डेढ़ क्विंटल वजनी कांवर तैयार किया है. डेढ क्विंटल वजनी कांवर के साथ बिहार के मिनी देवघर के रूप में कहे जाने वाले गुरूआ के बैजू धाम को जाएंगे. 

गया के सुदर्शन ने बनाई डेढ क्विंटल वजनी कांवर

गया के गुरारू के सुदर्शन कुमार भगवान भोले के अनोखे भक्त हैं. भगवान शंकर के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा और आस्था है. इस बार सुदर्शन ने एक खास कांवर तैयार किया है, जो 30 फीट लंबा है. अपने कुछ साथियों की मदद से इन्होंने यह कांवर तैयार किया है. पिछले एक महीने से ये कांवर तैयार करने में जुटे थे और अब यह कांवर लगभग तैयार हो गया है. कांवर को लेकर उन्हें देवघर जाना था. किंतु कुछ कारणों से बिहार के मिनी देवघर के रूप में प्रसिद्ध बैजू धाम को रवाना होंगे. दो अगस्त को यह कांवर लेकर रवाना होंगे और 3 अगस्त को सावन की पहली सोमवारी के दिन बाबा बैजू धाम के दरबार में पहुंचकर जल अर्पित करेंगे. इनके साथ टीम में स्थाई रूप से 11 सदस्य रहेंगे. वही, जिन्हें कांवर में साथ देना है या साथ में बैजूधाम चलना है, वे भी कांवर में कंधा लगा सकेगें. उनके लिए कोई रोक नहीं होगी. इन्हें अनुमान है, कि जब वे कांवर लेकर रवाना होंगे तो उनके साथ 11 स्थाई सदस्यों के अलावे सैकड़ो लोग भी इसमें शामिल होंगे.

घर का खर्च काट कर जमा किए रुपए

भगवान भोले के अनोखे भक्त गया के गुरारू के सुदर्शन ने 30 फीट लंबा और डेढ क्विंटल वजनी कांवर तैयार करने के लिए काफी मेहनत की. इसके लिए उन्होंने मजदूरी भी की. वही, फोटोग्राफी करने से आने वाले पैसे को बचा कर रखा. अपनी इच्छा को दबा कर इन्होंने किसी तरह से रुपए जमा किए और यह कांवर तैयार किया है. यह पिछले दो-तीन सालों से सोच रहे थे, कि 52 फीट लंबा या 30 फीट लंबा कांवर बनाएंगे. आर्थिक स्थिति देखकर इन्होंने 30 फीट लंबा कांवर बनाने का निर्णय लिया और फिर अपने साथियों की मदद से इन्होंने यह कांवर तैयार किया है. इसके लिए सुल्तानगंज जाकर उन्होंने काफी खरीददारी की. वहां से कांवर को सजाने के सामान लाए. वही, वहां से गंगाजल भी लाया है. अब तक करीब 25 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं. खुद मुफलिसी में रहने वाले सुदर्शन भगवान भोले की भक्ति के लिए अपना पेट काटकर यह रुपए जमा किए और कांवर बनाया. उन्हें चिंता है, कि अभी कुछ और रुपए खर्च होंगे, वह रुपए कहां से आएंगे, लेकिन उन्हें भगवान भोलेनाथ पर विश्वास है, कि वह किसी तरह से और खर्च होने वाले रुपए का जुगाड़ कर लेंगे, चाहे उन्हें घर का कोई सामान ही बेचना क्यों न पङे.

30 बार डाकबम के रूप में जा चुके हैं देवघर

सुदर्शन बचपन से ही भगवान भोले के भक्त रहे हैं. वह 30 सालों तक लगातार डाक बम के रूप में देवघर को जा चुके हैं. एक बार कांवर लेकर भी गए हैं. सिर्फ तीन साल वे बाबा के दरबार में देवघर नहीं गए. पिछले कुछ सालों से सोच रहे थे, कि बड़ा कांवर लेकर देवघर को जाएंगे. किंतु आर्थिक स्थिति मजबूरी बनी, तो इन्होंने 52 फीट के बजाए 30 फीट का लंबा कांवर बनाया, जो डेढ़ क्विंटल वजनी होगा. किंतु, इस बार देवघर के बजाए बिहार के मिनी देवघर कहे जाने वाले बैजू धाम में भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करने का निर्णय लिया. अपने 11 सदस्य वाली टीम के साथ बैजू धाम को 2 अगस्त को रवाना होंगे और 3 अगस्त को प्रथम सोमवारी को भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करेंगे.

मां के निधन और पैर टूटने के कारण पिछले तीन सालों से नहीं जा सका था देवघर

वहीं, गुरारू के रहने वाले शिव भक्त सुदर्शन बताते हैं, कि वह बचपन से ही देवघर जाते रहे हैं. एक बार कांवर लेकर 13 साल की उम्र में गया. फिर लगातार 30 सालों तक डाक बम बनकर देवघर जाता रहा और भगवान भोले को सावन में जल चढ़ाता रहा. पिछले कुछ सालों से वह देवघर नहीं गया. मां का निधन होने और मेरा पैर टूट जाने के कारण वह 3 साल से देवघर नहीं जा सके हैं. इसे लेकर सोच रहे थे, कि 52 फीट या 30 फीट का कांवर लेकर देवघर को जाएंगे. पूरी तैयारी भी थी. उन्होंने 30 फीट का कांवर के लिए सामान व सारे चीज सुल्तानगंज से खरीदे. गंगा जल भी सुल्तानगंज से लाया. डेढ क्विंटल वजनी कांवर तैयार भी करने लगा. किंतु, जब आकलन किया, तो पैसे कम पड़ने लगे, तो देवघर जाने का निर्णय छोड़ना पड़ा और अब हम लोग गुरुआ के बाबा बैजू धाम को जाएंगे, जो की गुरारू से करीब 30 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर भगवान भोलेनाथ का यह प्रसिद्ध स्थान है. यहां भगवान भोलेनाथ आप रूपी मिले थे. यहां भी सावन में श्रद्धालु कांवर लेकर जल चढ़ाने को पहुंचते हैं और इसे बिहार का मिनी देवघर भी कहा जाता है. पहाड़ पर यह बाबा बैजू धाम का स्थल है. यहां के भगवान भोलेनाथ की महिमा भी अपरंपार है. पैसे के अभाव में हमने बैजूधाम में जल अर्पित करने का निर्णय लिया है और 2 अगस्त को गुरारू से रवाना होंगे. 3 अगस्त सोमवारी की पहली तिथि को भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करेंगे.

दोस्त उड़ाते थे मजाक फिर भी हार नहीं मानी

सुदर्शन बताते हैं, कि उसकी स्थिति को देखते हुए उसके दोस्त मजाक उड़ाते थे. उन्हें लगता था, कि इतनी गरीबी के बीच यह 30 फीट का और डेढ क्विंटल वजनी कांवर कैसे बना सकेगा. किंतु भगवान भोले की कृपा से हमने यह किया और यह लगभग तैयार हो गया है. अब दोस्त लोगों को मजाक उड़ाने पर खराब लग रहा है. फिर भी हमने बुलाया है. हम चाहते हैं, कि इस 30 फीट लंबे और डेढ़ क्विंटल वजनी कांवर को लेकर हम निकले, तो अपने क्षेत्र के शांति-समृद्धि की कामना के साथ भगवान भोले के पास जाएं, ताकि हमारे क्षेत्र में पूरी तरह से शांति बनी रहे, क्षेत्र में समृद्धि आए, यह मनोकामना भी उनकी है.

पैसे जमा करने के लिए मजदूरी तक की

सुदर्शन बताते हैं, कि यह विशेष कांवर बनाने के लिए पैसे की जरूरत थी, तो मजदूरी तक किया. कुछ पैसे फोटोग्राफी के पेशे से भी आ गए. पेट काटकर हर महीने रुपए जमा करते थे, ताकि 52 फीट या 30 फीट का कांवर बना सकें. कांवर के लिए हरा बांस लगा है, जो कि 70 किलोग्राम से भी अधिक वजन का है. इसके अलावा फोम, गद्दा, वजनी घुंघरू, शस्त्र भी कांवर पर रहेंगे. सारी साज-सज्जा की जाएगी. वहीं, करीब 50-60 किलोग्राम से भी अधिक गंगाजल कांवर में रहेगा, जो कि बड़े-बड़े गागर में रहेंगे. यदि कुछ लोग और बढ़ गए तो गंगाजल और भी बढ़ जाएगा. यह कांवर डेढ़ किलो से भी अधिक वजनी हो जाएगा. इस कांवर के साथ जो भी लोग चलना चाहेंगे, जा सकेंगे. कांवर को कंधा दे सकेंगे. सुदर्शन बताते हैं, कि देवघर जाने के लिए कम से कम 2 लाख रुपए चाहिए थे, जो हमारे पास नहीं है. यदि पैसे होते, तो देवघर जाता, किंतु पैसे के अभाव में देवघर जाने का इरादा छोड़ना पड़ा. किंतु हर जगह भगवान है और गुरुआ में बैजू बाबा है, जिनकी महिमा अपरंपार है. इस अद्भुत कांवर से करीब 30 किलोमीटर की यात्रा कर बैजू धाम को पहुंचेंगे और प्रथम सोमवारी को भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे.

शिविर में भी देते हैं योगदान

वही, हर सावन में देवघर जाने के रास्ते में इनावरण में लगने वाले एक शिविर में भी अपना योगदान देते हैं. उनके एक गुरु के द्वारा हर साल इसे लगाया जाता है. सावन में लगने वाले उस शिविर में कभी बादाम भेजते हैं, तो कभी चावल- चीनी भेजते हैं. अपनी सक्षमता के अनुसार जो भी बन पड़ता है, शिविर में भेजते हैं, जो हमारी सक्षमता है, उससे भी अधिक सामान शिविर में भेजने की कोशिश करते हैं.

मनोज की रिपोर्ट