Bihar News : झारखंड पुलिस जवान की सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत, धनबाद में ड्यूटी से लौटते वक्त अज्ञात वाहन ने कुचला, गांव में पसरा सन्नाटा
Bihar News : गया जिले के बेलागंज प्रखंड अंतर्गत दलेलचक गांव निवासी और झारखंड पुलिस में कार्यरत जवान बिक्रम पाल उर्फ बिक्की (35) की बुधवार देर शाम सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई।
GAYAJI : बेलागंज प्रखंड के दलेलचक गांव निवासी एवं झारखंड पुलिस के जवान बिक्रम पाल उर्फ बिक्की की बुधवार देर शाम सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना से न सिर्फ उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, बल्कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गुरुवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी और पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिक्रम पाल झारखंड के धनबाद पुलिस लाइन में कार्यरत थे। बुधवार की शाम ड्यूटी समाप्त करने के बाद वह वापस पुलिस लाइन लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में एक अज्ञात वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और परिजनों को इसकी सूचना दी।
जवान की मौत की खबर मिलते ही दलेलचक गांव स्थित उनके घर में कोहराम मच गया। पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों की चीत्कार सुनकर गांव के लोग भी बड़ी संख्या में उनके घर पहुंच गए। हर कोई इस असमय हुई मौत से स्तब्ध नजर आया। ग्रामीणों ने बताया कि बिक्रम पाल के परिवार ने पहले भी ऐसी ही पीड़ा झेली थी। उनके पिता रामाशीष यादव भी झारखंड पुलिस में कार्यरत थे। वर्ष 2015 में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हो गई थी। पिता के निधन के बाद परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी को देखते हुए बिक्रम पाल की नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर झारखंड पुलिस में हुई थी। उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी सेवा निभाई, लेकिन नियति ने उन्हें भी असमय परिवार से छीन लिया।
बिक्रम पाल तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। उनके पीछे पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री हैं। अब उनके असमय निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है। गुरुवार को जब जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। पत्नी, बच्चों और भाई की हृदयविदारक चीख-पुकार से माहौल और भी मार्मिक हो गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। ग्रामीणों ने बताया कि बिक्रम पाल बेहद शांत, सरल और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनका गांव में सभी लोगों से आत्मीय संबंध था और उन्होंने कभी किसी से कोई बैर-भाव नहीं रखा। उनकी असामयिक मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है। लोगों ने सरकार से शोक संतप्त परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
मनोज की रिपोर्ट