Bihar News : गया में 'भारतीय ज्ञान परंपरा में श्राद्ध का महत्व' विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद का हुआ आयोजन, कुलपति प्रो लक्ष्मी नारायण पाण्डेय ने किया उद्घाटन
Bihar News : जभूषण संस्कृत महाविद्यालय, खरखुरा, गया के प्रांगण में शनिवार को "भारतीय ज्ञान परंपरा में श्राद्ध का महत्व" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का भव्य और सफल आयोजन किया गया।
GAYAJI : ब्रजभूषण संस्कृत महाविद्यालय, खरखुरा, गया में आज "भारतीय ज्ञान परम्परा में श्राद्ध का महत्व" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का सफल आयोजन हुआ। यह महाविद्यालय कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा की अंगीभूत इकाई है। परिसंवाद के मुख्य अतिथि कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो लक्ष्मी नारायण पाण्डेय रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। तो वहीं सभी अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि श्राद्ध केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा में पितरों के प्रति कृतज्ञता और पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक है। पितृपक्ष के दौरान गया का महत्व विश्व प्रसिद्ध है और यहाँ का श्राद्ध मोक्षदायी माना जाता है। इस मौके पर राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक शिक्षाविद् डॉ एस के सुनील ने कहा कि "श्राद्ध भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल मृतकों को याद करने का विधान नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और पूर्वजों के बीच के अटूट संबंध को दर्शाता है।
गया की धरती पर इस विषय पर चर्चा होना अपने आप में गौरव की बात है। भारतीय ज्ञान परम्परा में श्राद्ध का वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।"परिसंवाद में विभिन्न विद्वानों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए और कहा कि श्राद्ध परम्परा में विज्ञान, समाजशास्त्र और आध्यात्म का अद्भुत समन्वय है।
इस मौके पर ब्रज भूषण संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य,डॉ० जितेन्द्र कुमार ने सभा को सम्बोधित करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा में श्राद्ध का महत्व पर जोर देते हुए कुलपति का आभार जताया। जबकि श्री स्वामी परांकुशाचार्य आदर्श संस्कृत महावि०, हुलासगंज, जहानाबाद के पूर्व प्रधानाचार्य,डॉ० वेंकटेश शर्मा,डॉ० कुसुम पाण्डेय ने सभा को सम्बोधित किया तो वहीं डॉ रामकेश्वर , डॉ सुनील , डॉ हेमवती नंदन , डॉ विदुषी, डॉ बाला जी, डॉ अंबुज , डॉ आरती, डॉ अंजनी, सुशील सहित काफी संख्या में संस्कृत शिक्षक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
विक्रमादित्य की रिपोर्ट