पितृपक्ष मेला 2026: तकनीक और परंपरा का अनोखा संगम, गया में श्रद्धालुओं के लिए अभूतपूर्व इंतजाम

गयाजी में विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में आनेवाले श्रद्धालुओं के लिए इसबार अभूतपूर्व इंतजाम किए गए है। बिहार सरकार द्वारा पितृपक्ष मेला के दौरान प्रतिदिन 75,348 लोगों के निःशुल्क आवासन की व्यवस्था की गई है....

पितृपक्ष मेला में श्रद्धालुओं के लिए अभूतपूर्व इंतजाम- फोटो : मनोज कुमार

Gayaji : गयाजी में विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेले का शुक्रवार को शुभारंभ हो गया। इसबार इस मेले में आनेवाले श्रद्धालुओं के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए गए है। गया सर्किट हाउस में जिले के प्रभारी मंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 'पितृपक्ष मेला 2026' की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पारंपरिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ अत्याधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।


गुमशुदगी रोकने को QR कोड रिस्ट बैंड और AI तकनीक का सहारा 

मेला क्षेत्र में बच्चों और बुजुर्गों के बिछड़ने की समस्या से निपटने के लिए परिजनों के विवरण युक्त 'QR Code Wrist Band' पहनाए जा रहे हैं। गुमशुदगी की स्थिति में अलर्ट मैसेज परिजनों के पास पहुंचेगा। इसके अलावा, पूरे शहर में क्राउड मैनेजमेंट और गुमशुदा लोगों की खोज के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फेस रिकॉग्निशन कैमरों की मदद ली जा रही है।


गूगल ट्रांसलेटर से सुसज्जित हेल्प डेस्क और कायाकल्प अभियान 

विभिन्न राज्यों एवं देशों से आने वाले श्रद्धालुओं की भाषाई समस्या को दूर करने के लिए सभी हेल्प डेस्क पर 'Google Translator System' लगाया गया है। वहीं 'कायाकल्प अभियान' के तहत गया शहर की दीवारों पर स्थानीय बच्चों द्वारा भगवान विष्णु से जुड़ी मनमोहक कलाकृतियां बनाई गई हैं, जिससे शहर का सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक आकर्षण बढ़ा है।


75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए रोजाना निःशुल्क आवासन 

राज्य सरकार द्वारा प्रतिदिन 75,348 श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क ठहरने की व्यवस्था की गई है। मेला क्षेत्र में 943 शौचालय, 134 स्नानागार, 74 चेंजिंग रूम, 280 चापाकल और 890 नल लगाए गए हैं। पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए PHED लैब्स में रोजाना पानी की गुणवत्ता जांच की जा रही है।


स्वास्थ्य शिविर, 30 रुपये में भोजन और निःशुल्क ई-रिक्शा की सुविधा 

श्रद्धालुओं की चिकित्सा सेवा के लिए 70 स्वास्थ्य शिविरों में 125 डॉक्टर और 178 पैरामेडिकल स्टाफ तैनात किए गए हैं। साथ ही आवागमन के लिए 150 निःशुल्क ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को मात्र ₹30 में गुणवत्तापूर्ण सात्विक भोजन उपलब्ध कराने के लिए 'जीविका दीदियों की रसोई' का भी संचालन किया जा रहा है।

मनोज की रिपोर्ट