Bihar News : गयाजी में मूर्तिकार विक्की बिंदु ने बिना मिट्टी और रंग के बनाई माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा, 50 हजार पेंसिल और छिलकों का किया इस्तेमाल

Bihar News : गयाजी के मूर्तिकार विक्की बिंदु अपनी अनोखी कलाकारी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। वे करीब 50 हजार पेंसिलों और उनके छिलकों से मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा तैयार कर रहे हैं।

माँ दुर्गा की अनोखी मूर्ति - फोटो : MANOJ

GAYAJI : जिले में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं गया के एक मूर्तिकार अपनी अनोखी कलाकारी से पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गए हैं। गया शहर के बागेश्वरी मोहल्ले के रहने वाले मूर्तिकार विक्की बिंदु इस बार करीब 50 हजार पेंसिलों और उनके छिलकों से मां दुर्गा की एक भव्य और आकर्षक प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। यह अद्भुत कलाकृति इस बार कला और आस्था के अनोखे संगम का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही है, जिसे देखने के लिए लोग अभी से काफी उत्सुक नजर आ रहे हैं।

मिट्टी और रंगों की जगह पेंसिलों और छिलकों का कमाल

इस विशेष प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में पारंपरिक मिट्टी और रंगों का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। विक्की बिंदु पेंसिल और उससे निकलने वाले छिलकों का इस्तेमाल करके न सिर्फ मां दुर्गा, बल्कि माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती, भगवान कार्तिकेय, माता के वाहन शेर और महिषासुर की पूरी प्रतिमाओं को बेहद खूबसूरती से आकार दे रहे हैं। बेकार समझी जाने वाली इन सामग्रियों से बनी यह कलाकृति लोगों को काफी आकर्षित कर रही है।

बच्चों के पेंसिल छीलने के अंदाज से आया अनोखा विचार

मूर्तिकार विक्की बिंदु को यह नायाब विचार तब आया जब उन्होंने छोटे बच्चों को पेंसिल छीलकर उसके छिलकों को यूं ही कचरे में फेंकते हुए देखा था। इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वे इन बेकार समझे जाने वाले छिलकों से ही मां दुर्गा की प्रतिमा बनाएंगे। इस कलाकृति को मूर्त रूप देने के लिए वे पिछले डेढ़ महीने से लगातार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में अब तक करीब 20 हजार पेंसिलों का उपयोग किया जा चुका है, जबकि पूरी प्रतिमा के निर्माण में लगभग एक लाख रुपये तक खर्च होने का अनुमान है।

कोरोना काल में छूटी इंजीनियर की नौकरी, विरासत में मिली कला को बनाया पेशा

मूल रूप से मूर्ति कला विक्की बिंदु को अपने परिवार से विरासत में मिली है। हैरान करने वाली बात यह है कि वे पहले एक इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी छूट जाने के बाद उन्होंने पूरी तरह से मूर्ति कला को ही अपना मुख्य पेशा बना लिया। इससे पहले भी वे बांस, सिल्वर फोइल और अन्य कई अनोखी तथा कबाड़ सामग्री से मनमोहक प्रतिमाएं बना चुके हैं। उनकी यह सृजनात्मक सोच समाज में वेस्ट मैनेजमेंट का भी एक बड़ा संदेश दे रही है।

फतेहगंज रोड में होगी स्थापित, देखने के लिए उमड़ रही भीड़

विक्की बिंदु द्वारा पेंसिलों और छिलकों से तैयार की जा रही यह अनूठी प्रतिमा गया शहर के फतेहगंज रोड स्थित पूजा पंडाल में स्थापित की जाएगी। नवरात्र के दौरान इस कला के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। मूर्तिकार की यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का अनूठा प्रतीक है, बल्कि यह साबित करती है कि थोड़ी सी रचनात्मकता से बेकार वस्तुओं को भी एक अमूल्य कलाकृति में बदला जा सकता है।

मनोज की रिपोर्ट