Bihar News : गयाजी में वित्त रहित शिक्षकों ने उठाई नियमित वेतनमान की मांग, मुख्यमंत्री के गया आगमन पर टिकी निगाहें

Bihar News : डिग्री कॉलेजों को 2008 से मिलने वाला अनुदान, जो छात्रों के रिजल्ट के आधार पर देय है, वह 2018 से 2026 तक (लगभग नौ वर्षों का) बकाया है.जिसकी मांग शिक्षकों ने की है.....पढ़िए आगे

शिक्षकों की मांग - फोटो : SOCIAL MEDIA

GAYAJI : बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि और वित्त रहित शिक्षक-कर्मचारी महासंघ के प्रदेश संयोजक विजय कुमार मिट्ठू के नेतृत्व में पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली और कई शिक्षाविदों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेताओं का कहना है कि दशकों से संचालित हजारों वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों (डिग्री कॉलेज से लेकर मध्य विद्यालय तक) के कर्मचारी लगातार मांग के बावजूद नियमित वेतन और पेंशन से वंचित हैं। सरकारी शिक्षण संस्थानों के समान सुविधाएं न मिलने के कारण इन कर्मचारियों में भारी मायूसी और आक्रोश व्याप्त है।

न्यायालय के आदेश और सरकार की 'कमेटी' पर सवाल

नेताओं ने याद दिलाया कि वर्ष 2025 में पटना उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरकार को आदेश दिया था कि तीन माह के भीतर सभी कर्मचारियों को नियमित वेतनमान और पेंशन सुनिश्चित की जाए। हालांकि, सरकार ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी। वर्तमान स्थिति यह है कि चुनाव से पहले आश्वासन तो दिया गया और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित की गई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कमेटी की ओर से कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

नौ वर्षों का बकाया अनुदान: भुखमरी के कगार पर परिवार

महासचिव टिंकू गिरी और प्रो. कमलेश यादव सहित अन्य नेताओं ने आर्थिक संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि डिग्री कॉलेजों को 2008 से मिलने वाला अनुदान, जो छात्रों के रिजल्ट के आधार पर देय है, वह 2018 से 2026 तक (लगभग नौ वर्षों का) बकाया है। मानदेय और अनुदान न मिलने के कारण हजारों शिक्षक और उनके परिवार आज भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की वादाखिलाफी उनके भविष्य को अंधकार में धकेल रही है।

नए कॉलेजों के लिए फंड, पुराने शिक्षकों की अनदेखी क्यों?

कांग्रेस नेताओं ने सम्राट चौधरी सरकार के हालिया फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने सूबे के 534 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज सुनिश्चित करने के लिए 208 नए कॉलेजों हेतु 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं और 10 हजार नए पदों पर बहाली का निर्णय लिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि लगभग 200 पुराने अनुदानित कॉलेजों के 25 हजार अनुभवी शिक्षक एवं कर्मचारियों के नियमित वेतनमान और पेंशन के मुद्दे पर सरकार चुप्पी क्यों साधे हुए है?

मुख्यमंत्री से विनम्र आग्रह: 1 मई को घोषणा की उम्मीद

आगामी 1 मई (मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा) के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के गया और बोधगया आगमन को देखते हुए महासंघ ने उनसे विशेष अपील की है। नेताओं ने मांग की है कि मुख्यमंत्री 40 वर्षों से लंबित इस गंभीर मामले पर संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्य के वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों के लिए नियमित वेतनमान और पेंशन की घोषणा करें। इस मांग का समर्थन करने वालों में डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, विपिन बिहारी सिन्हा और प्रो. विश्वनाथ कुमार सहित कई गणमान्य लोग शामिल हैं।