जहानाबाद में चाचा को अस्पताल से घर लाने निकले थे दो चचेरे भाई, नहर में समा गई कार, दोनों की मौत से गांव में पसरा मातम

Bihar News:चाचा को पटना के अस्पताल से घर लाने निकले दो चचेरे भाइयों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। पालीगंज थाना क्षेत्र के मसौढ़ा स्थित सोन नहर के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरी।

दर्दनाक हादसा- फोटो : social Media

Jahanabad: जिले के मेहंदिया थाना क्षेत्र के उसरी गांव के लिए बेहद मनहूस साबित हुआ। चाचा को पटना के अस्पताल से घर लाने निकले दो चचेरे भाइयों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। पालीगंज थाना क्षेत्र के मसौढ़ा स्थित सोन नहर के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरी। हादसे में सिंधु कुमार और रंजीत कुमार  की जान चली गई। घटना की खबर मिलते ही उसरी गांव में मातम पसर गया।ग्रामीणों के अनुसार, दोनों युवक अपने चाचा को पटना से घर लाने के लिए कार से निकले थे। उनके चाचा का पटना में ऑपरेशन हुआ था और रविवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें वापस घर लाने की तैयारी थी। इसी दौरान मसौढ़ा के समीप अचानक कार अनियंत्रित होकर सोन नहर में जा गिरी।

बताया जा रहा है कि हादसे के समय कार के शीशे बंद थे, जिसके कारण दोनों युवक वाहन के भीतर ही फंस गए। ग्रामीण भारत शर्मा के मुताबिक, दुर्घटना के बाद सिंधु कुमार ने किसी तरह अपने घर फोन कर हादसे की जानकारी दी और बचाने की गुहार लगाई। हालांकि, कुछ ही देर बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। इसके बाद परिजन और ग्रामीण अनहोनी की आशंका से परेशान हो उठे। थोड़ी देर बाद दोनों युवकों के नहर में डूबने की खबर मिली तो पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।

बचपन से साथ, मौत भी नहीं कर सकी जुदा

सिंधु और रंजीत रिश्ते में चचेरे भाई थे। दोनों के पिता भी आपस में चचेरे भाई बताए जाते हैं। पारिवारिक रिश्ते के साथ दोनों युवकों के बीच बचपन से ही बेहद गहरा लगाव था। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों को अक्सर साथ-साथ ही देखा जाता था। कहीं आना-जाना हो या कोई काम, दोनों एक-दूसरे के साथ रहते थे।ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों के बीच इतनी गहरी दोस्ती और आत्मीयता थी कि गांव में भी उनकी जोड़ी की मिसाल दी जाती थी। साथ रहने और हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने वाले दोनों भाइयों की एक साथ असमय मौत ने परिवार ही नहीं, पूरे गांव को झकझोर दिया है।

माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा छिना

ग्रामीण भारत शर्मा, जयनंदन शर्मा, वशिष्ठ शर्मा और दिलीप कुमार समेत अन्य लोगों ने बताया कि दोनों युवक साधारण परिवार से आते थे और अपने माता-पिता के लिए बुढ़ापे का बड़ा सहारा थे। परिवार को उम्मीद थी कि युवा होने के बाद दोनों मेहनत कर घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करेंगे और माता-पिता की जिम्मेदारियां संभालेंगे।

लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने परिवार की सारी उम्मीदें पलभर में तोड़ दीं। दोनों युवकों की मौत के बाद उनके घरों में चीख-पुकार मची हुई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि इस हादसे ने दो परिवारों से उनके बेटों का ही नहीं, बल्कि बुढ़ापे का वह सहारा भी छीन लिया, जिस पर पूरी जिंदगी की उम्मीद टिकी थी।