Bihar News: विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद नावों पर जान जोखिम में डालकर झारखंड जा रहे लोग, मनिहारी घाट बना मजबूरी का रास्ता, फेरी सेवा बंद, फिर भी नाव पर सवार हो रहे लोग

Bihar News: विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद उत्तर बिहार और झारखंड के बीच आवागमन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।....

विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद नावों पर जान जोखिम में डालकर झारखंड जा रहे लोग- फोटो : reporter

Bihar News: भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद उत्तर बिहार और झारखंड के बीच आवागमन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जो अब मजबूरी में गंगा नदी के खतरनाक जलमार्ग को अपनाने पर विवश है। कटिहार जिले के मनिहारी गंगा घाट से लोग छोटे-छोटे नावों के सहारे साहिबगंज (झारखंड) तक जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। यह स्थिति विशेष रूप से लगन के इस व्यस्त मौसम में और भी भयावह हो गई है, जब शादी-विवाह के चलते लोगों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है। कई परिवार पहले से तय शादी कार्यक्रमों को लेकर असमंजस में हैं, लेकिन मजबूरी ऐसी कि रास्ता बंद होने के बावजूद लोग किसी तरह झारखंड पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आधिकारिक रूप से मनिहारी से साहिबगंज तक फेरी सेवा फिलहाल बंद है, लेकिन इसके बावजूद कुछ नाविक जोखिम उठाकर अवैध या अस्थायी रूप से छोटी नावों का संचालन कर रहे हैं। ये नावें क्षमता से ज्यादा यात्रियों को बैठाकर गंगा पार कर रही हैं, जिससे किसी भी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।

गंगा का प्रवाह इस समय सामान्य से तेज बताया जा रहा है, बावजूद इसके लोग मजबूरी में इस खतरनाक सफर को अपनाने पर विवश हैं। यात्रियों में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं, जो बिना किसी सुरक्षा उपकरण के नावों पर यात्रा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सेतु बंद होने के बाद यह मार्ग उनकी “लाइफलाइन” बन गया है, लेकिन यह जीवनरेखा अब जानलेवा साबित हो रही है। कई लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही भी बता रहे हैं, क्योंकि वैकल्पिक व्यवस्था समय पर नहीं की गई।

इधर कटिहार जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है। जिलाधिकारी ने कहा है कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी मिल चुकी है और जल्द ही मनिहारी–साहिबगंज फेरी सेवा को दोबारा शुरू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि वैकल्पिक और सुरक्षित व्यवस्था बहाल करने पर काम चल रहा है, ताकि लोगों को इस तरह जान जोखिम में डालकर यात्रा न करनी पड़े।

लेकिन फिलहाल हकीकत यह है कि टूटे पुल और बंद फेरी सेवा के बीच आम जनता मजबूरी की नाव पर सवार होकर गंगा पार कर रही है, जहां हर सफर के साथ एक अनिश्चितता और खतरे की परछाई साथ चल रही है। यह स्थिति न सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि आपदा जैसी परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था की कमी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह