Bihar Flood: खेतों से बाढ़ का पानी उतरते ही किसानों को ग्रीन गोल्ड का सहारा, यूरिया का विकल्प बन सकता है ओजाला
Bihar Flood:बाढ़ का पानी उतरने के बाद किसान एक बार फिर खेतों की ओर लौटने की तैयारी में हैं। ...
Bihar Flood:बाढ़ का पानी उतरने के बाद कटिहार के किसान एक बार फिर खेतों की ओर लौटने की तैयारी में हैं। कई इलाकों में खेतों में अभी भी दो से तीन फीट तक पानी जमा है। ऐसे में सामान्य तरीके से खेती शुरू करना किसानों के लिए चुनौती बन सकता है। इसी परिस्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए ओजाला (Azolla) को संभावित विकल्प के तौर पर सामने रखा है। इसे कई जगह ‘ग्रीन गोल्ड’ भी कहा जाता है।
कटिहार संयुक्त कृषि भवन परिसर में कृषि विभाग की ओर से ओजाला की छोटे स्तर पर डेमो खेती की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को ओजाला के उत्पादन और इस्तेमाल की जानकारी देना है, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी वाली जमीन पर उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार किसान इसका उपयोग कर सकें।
कृषि विभाग के अनुसार, ओजाला एक जलीय फर्न है, जिसे पानी की सतह पर उगाया जा सकता है। धान की खेती में इसका उपयोग जैविक नाइट्रोजन स्रोत के तौर पर किया जाता है। यही वजह है कि इसे रासायनिक उर्वरकों, खासकर यूरिया के विकल्प या पूरक के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना पर जोर दिया जा रहा है।
कटिहार में बनाए गए डेमो मॉडल के जरिए किसानों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि ओजाला को किस तरह तैयार किया जा सकता है और खेत में इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए। विभाग की ओर से मांग के अनुसार किसानों को ओजाला उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। इसका मकसद बाढ़ के बाद ऐसी जमीन, जहां पानी की स्थिति खेती के अनुकूल हो, वहां किसानों को कम लागत वाले जैविक विकल्प की जानकारी देना है।
बाढ़ के कारण धान समेत खरीफ फसलों को नुकसान उठाने वाले किसानों के सामने दोबारा खेती शुरू करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में कृषि विभाग की यह पहल किसानों को वैकल्पिक कृषि तकनीक से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। खासकर उन इलाकों में जहां खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है, वहां ओजाला आधारित तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
हालांकि, ओजाला को यूरिया का पूर्ण विकल्प मानने से पहले इसकी मात्रा, खेत की स्थिति, फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूरी होगी। कृषि विभाग भी डेमो मॉडल के जरिए इसकी उपयोगिता का आकलन कर किसानों तक जानकारी पहुंचाने में जुटा है।
अब सवाल यह है कि बाढ़ की तबाही के बाद कटिहार के किसानों को ओजाला से वास्तविक स्तर पर कितना फायदा मिल सकता है और धान की खेती में इसका इस्तेमाल किस हद तक रासायनिक उर्वरक की जरूरत को कम कर सकता है। इसको लेकर जिला कृषि पदाधिकारी से विभागीय जानकारी और किसानों के अनुभव सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह