गंगा का रौद्र रूप, कटाव की जद आए कटिहार के चार वार्ड, पंचायत भवन पर मंडराया खतरा, बेबस लोग बोले-अब सरकार नहीं, गंगा मैया ही सहारा

Bihar Flood News: गंगा की उफनती धार हर रोज गांव की जमीन निगल रही है और अब पंचायत के चार वार्डों का वजूद ही खतरे में पड़ गया है।

अब सरकार नहीं, गंगा मैया ही सहारा- फोटो : reporter

Katihar: जिले के मनिहारी प्रखंड की धूरियाही पंचायत इन दिनों गंगा के भीषण कटाव की त्रासदी से कराह रही है। गंगा की उफनती धार हर रोज गांव की जमीन निगल रही है और अब पंचायत के चार वार्डों का वजूद ही खतरे में पड़ गया है। करीब तीन वर्षों से लगातार कटाव का कहर झेल रहे ग्रामीण सरकारी मदद की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

धूरियाही पंचायत के वार्ड संख्या 3, 4, 5 और 6 में गंगा का कटाव इतनी तेज रफ्तार से हो रहा है कि लोगों के दिलों में दहशत और आंखों में बेबसी साफ दिखाई दे रही है। कभी हरे-भरे खेत और आबाद घरों से गुलजार रहने वाला इलाका अब वीरानी की तस्वीर पेश कर रहा है। गंगा की लहरें हर दिन किसी न किसी आशियाने को अपने आगोश में समेट रही हैं।स्थानीय लोगों के मुताबिक, अब तक सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन और सौ से अधिक घर गंगा में समा चुके हैं। अपना सब कुछ गंवा चुके कई परिवार गांव छोड़कर दूसरे इलाकों में पलायन कर चुके हैं। वहीं करीब 200 से अधिक परिवार आज भी इस डर के साये में जी रहे हैं कि न जाने अगली बारी उनके घर की हो।

कटाव की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धूरियाही पंचायत सरकार भवन भी अब खतरे के दायरे में आ गया है। कटाव स्थल और पंचायत भवन के बीच की दूरी घटकर महज 50 से 60 मीटर रह गई है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो पंचायत का सरकारी भवन भी गंगा की धारा में समा सकता है।ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने करीब 250 मीटर क्षेत्र में कटाव निरोधी कार्य जरूर कराया है, लेकिन जहां लगभग दो किलोमीटर इलाके में कटाव हो रहा हो, वहां यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। लोगों की मांग है कि बड़े पैमाने पर स्थायी कटाव निरोधी परियोजना शुरू की जाए, ताकि पंचायत का अस्तित्व बचाया जा सके।

सरकारी इंतजार से मायूस ग्रामीण अब आस्था का सहारा लेने को मजबूर हैं। गांव की सैकड़ों महिलाएं बूढ़ी मां और गंगा मां की पूजा-अर्चना कर रही हैं। महिलाएं मानती हैं कि जब प्रशासन और सरकार से उम्मीद टूटने लगी है, तब गंगा मैया की कृपा ही गांव को विनाश से बचा सकती है।

स्थानीय महिलाओं की आंखों में दर्द साफ झलकता है। उनका कहना है, "अब सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है। हम बूढ़ी मां और गंगा मां से प्रार्थना कर रहे हैं कि उनका रौद्र रूप शांत हो जाए और हमारा गांव गंगा में समाने से बच जाए।"गंगा का यह लगातार बढ़ता कटाव सिर्फ जमीन नहीं निगल रहा, बल्कि लोगों के सपने, रोज़गार, आशियाने और भविष्य भी अपने साथ बहाकर ले जा रहा है। अब निगाहें सरकार और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब धूरियाही पंचायत को इस विनाशकारी कटाव से बचाने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएंगे।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह