70 किलोमीटर का सफर अब सिर्फ 20 मिनट में! कोसी की लहरों पर तैयार हुआ 25 करोड़ का 'जादुई' रास्ता, 28 जनवरी से बदलेगी तकदीर

500 मीटर लंबे और 25 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले इस पुल के शुरू होने से क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। प्रशासन और स्थानीय लोगों के अनुसार, 28 जनवरी से इस पुल को आम वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा

Khagaria  : बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी अंतर्गत बीरबास गांव के पास कोसी नदी पर बहुप्रतीक्षित पीपा पुल बनकर तैयार हो गया है। लगभग 500 मीटर लंबे और 25 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले इस पुल के शुरू होने से क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। प्रशासन और स्थानीय लोगों के अनुसार, 28 जनवरी से इस पुल को आम वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे खगड़िया और मधेपुरा समेत कई जिलों की दूरी काफी सिमट जाएगी। 

25 करोड़ की लागत और 500 मीटर की लंबाई

खगड़िया के गोगरी में कोसी नदी पर निर्मित यह पीपा पुल तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 500 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण में 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। प्रशासन का मानना है कि इस पुल के निर्माण से दियारा क्षेत्र की बड़ी आबादी को जिला मुख्यालय और अन्य शहरों से जुड़ने में अब घंटों की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। 

मधेपुरा और खगड़िया के बीच 45 किलोमीटर की बचत

इस पुल के चालू होने का सबसे बड़ा प्रभाव यात्रा की दूरी पर पड़ेगा। यह पुल मधेपुरा के जीरो माइल को सीधे कपसिया घाट से जोड़ता है। वर्तमान में आलमनगर जाने के लिए लोगों को लगभग 70 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, लेकिन इस पुल के माध्यम से यह सफर घटकर मात्र 25 किलोमीटर रह जाएगा। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि ईंधन और खर्च में भी भारी कमी आएगी। 

एक लाख की आबादी और 25 गांवों को सीधा लाभ

कोसी नदी पर बने इस पीपा पुल से खगड़िया, मधेपुरा, मुंगेर और भागलपुर जिलों के कम से कम 25 दियारा गांवों के लोगों को सीधा फायदा होगा। अब तक करीब एक लाख से ज्यादा लोग अपनी यात्रा के लिए नाव या बेहद लंबे और जोखिम भरे रास्तों पर निर्भर थे। अब पीपा पुल के माध्यम से इन लोगों को रोजमर्रा के कार्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शहर आना बेहद आसान हो जाएगा। 

विधायक बाबूलाल शौर्य ने बताया 'ऐतिहासिक उपलब्धि'

परबत्ता विधानसभा क्षेत्र के लोजपा (रामविलास) विधायक बाबूलाल शौर्य ने इस पुल के निर्माण को इलाके की दशकों पुरानी मांग का पूरा होना बताया है। उनके अनुसार, पीपा पुल के चालू होने से स्थानीय लोगों की सामाजिक और आर्थिक जिंदगी में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि पुल के शुरू होने से यातायात व्यवस्था सुगम होगी और क्षेत्र का पिछड़ापन दूर होगा। 

28 जनवरी से शुरू होगा यातायात

तय योजना के अनुसार, यदि अंतिम चरण की तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं, तो यह पुल 28 जनवरी से सभी प्रकार के हल्के और भारी वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। पुल के उद्घाटन की खबर से स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। वर्षों से कोसी की बाधा को पार करने के लिए नाव का सहारा ले रहे लोगों के लिए यह पुल किसी सौगात से कम नहीं है।