स्वास्थ्य मंत्री के ऑर्डर पर भारी बड़हिया CHC का फरमान! पत्रकारों की एंट्री पर रोक, डीएम के एक्शन के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था,ठेंगे पर आदेश

Bihar Health Department: बिहार के स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़हिया CHC के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के हस्ताक्षर से अस्पताल परिसर में एक सूचना चस्पा की गई है...

स्वास्थ्य मंत्री के ऑर्डर पर भारी बड़हिया CHC का फरमान!- फोटो : reporter

Bihar Health Department: बिहार के स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि पत्रकारों को सरकारी अस्पतालों में जाकर रिपोर्टिंग करने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने मीडिया कवरेज को पत्रकारों का संवैधानिक अधिकार बताते हुए अस्पताल प्रशासन को इसमें किसी भी तरह की बाधा नहीं डालने की हिदायत दी थी।लेकिन लखीसराय जिले के बड़हिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के उलट एक ऐसा फरमान सामने आया है, जिसने पूरे मामले को तूल दे दिया है।

बड़हिया CHC के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सत्येंद्र नारायण मोहन पासवान के हस्ताक्षर से अस्पताल परिसर में एक सूचना चस्पा की गई है, जिसमें लिखा है कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के आदेश के बिना अस्पताल परिसर में वीडियोग्राफी पूर्ण रूप से वर्जित है।

सूचना में आम लोगों और पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि अस्पताल परिसर में वीडियो बनाने के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। इस आदेश के सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या किसी अधिकारी को स्वास्थ्य मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पत्रकारों की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का अधिकार है?

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले खुद लखीसराय के जिलाधिकारी सह जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ने बड़हिया CHC का औचक निरीक्षण किया था और अस्पताल की व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए थे।17 और 18 जुलाई की रात हुए निरीक्षण में डीएम ने पाया था कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार नया अस्पताल भवन बंद पड़ा है, जबकि पहले ही सभी सेवाओं को नए भवन में शिफ्ट करने का निर्देश दिया जा चुका था। निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी भी मुख्यालय से अनुपस्थित पाए गए थे।डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुपस्थित चिकित्सकों से जवाब तलब करने, अंतिम निर्णय तक वेतन रोकने, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने, अस्पताल में CCTV कैमरे और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लगाने, दवा वितरण केंद्र शुरू करने, रोस्टर सार्वजनिक करने और सिविल सर्जन को नियमित निगरानी का निर्देश दिया था।

लेकिन डीएम की कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद अस्पताल परिसर में लगा यह नया आदेश प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। सवाल उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन अस्पताल की कमियों को दूर करने में जुटा है, तब अस्पताल प्रशासन पारदर्शिता बढ़ाने के बजाय मीडिया और आम लोगों की निगरानी पर रोक लगाने वाला आदेश क्यों जारी कर रहा है? विपक्ष और सामाजिक संगठनों के लिए यह मुद्दा सरकार को घेरने का नया हथियार बन सकता है। क्योंकि एक तरफ सरकार पारदर्शी स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के ही अधिकारी ऐसे आदेश जारी कर रहे हैं, जिन्हें मंत्री के निर्देशों के विपरीत माना जा रहा है।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या बड़हिया CHC के इस आदेश की समीक्षा होगी या फिर जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की जाएगी। सवाल सिर्फ एक सूचना पत्र का नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था का है।देखना है कि लिपापोती होती है या कार्रवाई होती है।

रिपोर्ट- कमलेश कुमार सिंह