Bihar News : 17 साल बाद कानून के शिकंजे में आया लखीसराय कोर्ट से फरार कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा, संयुक्त ऑपरेशन में हुई गिरफ्तारी

Bihar News : वर्ष 2009 में लखीसराय कोर्ट परिसर पर हुए चर्चित नक्सली हमले के दौरान पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा आखिरकार 17 साल बाद सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया।

कुख्यात नक्सली गिरफ्तार - फोटो : KAMLESH

LAKHISARAI : वर्ष 2009 में लखीसराय कोर्ट परिसर पर हुए चर्चित नक्सली हमले के दौरान पुलिस अभिरक्षा से फरार कराया गया कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा आखिरकार 17 साल बाद सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया। झारखंड के धनबाद-गिरिडीह सीमा स्थित मनियाडीह क्षेत्र में आईबी, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियान में उसकी गिरफ्तारी हुई। इसे देशभर में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

गुप्त सूचना पर बिछाया गया जाल, दो सहयोगी भी गिरफ्तार

सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ वाहन से गुजरने वाला है। सूचना मिलते ही संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर कार्रवाई की। ऑपरेशन के दौरान मिसिर बेसरा को दबोच लिया गया। उसके साथ मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को भी गिरफ्तार किया गया, जबकि दो अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

2009 के लखीसराय कोर्ट हमले से जुड़ा था नाम

मिसिर बेसरा को वर्ष 2007 में झारखंड के खूंटी जिले से गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2009 में पेशी के लिए उसे लखीसराय कोर्ट लाया गया था। इसी दौरान भारी हथियारों से लैस माओवादियों ने कोर्ट परिसर पर हमला बोल दिया। अंधाधुंध फायरिंग और विस्फोट के बीच पुलिस पर हमला कर उसे छुड़ा लिया गया। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी और बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

चार राज्यों में 150 से अधिक मामले, ₹2.20 करोड़ का इनाम

झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ का रहने वाला मिसिर बेसरा छात्र जीवन में ही माओवादी संगठन से जुड़ गया था। समय के साथ वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल हो गया। फरारी के दौरान उसने सारंडा, कोल्हान और बूढ़ा पहाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में संगठन की गतिविधियों का संचालन किया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मिसिर बेसरा के खिलाफ बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हत्या, पुलिस पर हमले, विस्फोट, लेवी वसूली और नक्सली हिंसा सहित 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी दो मामलों में उसकी तलाश कर रही थी। उस पर झारखंड सरकार ने ₹1 करोड़ और ओडिशा सरकार ने ₹1.20 करोड़ का इनाम घोषित कर रखा था।

नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका

अधिकारियों का कहना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ा झटका है। हाल के वर्षों में लगातार चल रहे अभियानों और नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बीच इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ ही 2009 का लखीसराय कोर्ट हमला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उस हमले ने पूरे देश का ध्यान लखीसराय की ओर खींचा था। अब 17 साल बाद उसी घटना का मुख्य आरोपी दोबारा कानून की गिरफ्त में है।

कमलेश की रिपोर्ट