Bihar News: नल-जल पाइप में घुसा नाले का गंदा पानी, नगर परिषद बेख़बर, बिहार में लोगों के सेहत से हो रहा खिलवाड़
Bihar News: बिहार में नाले का गंदा, सड़ा-बदबूदार पानी नल-जल की पाइपलाइन में घुस रहा है और वही दूषित पानी लोगों के घरों तक पहुंचने का खतरा बना हुआ है, जबकि नगर परिषद आंख मूंदे तमाशबीन बनी हुई है।...
Bihar News: बिहार में नाले का गंदा, सड़ा-बदबूदार पानी नल-जल की पाइपलाइन में घुस रहा है और वही दूषित पानी लोगों के घरों तक पहुंचने का खतरा बना हुआ है, जबकि नगर परिषद आंख मूंदे तमाशबीन बनी हुई है।लखीसराय बड़हिया नगर परिषद की लापरवाही अब सिर्फ बदइंतजामी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर अवाम की जान से खिलवाड़ बन चुकी है। वार्ड नंबर-10 में हर घर नल-जल योजना, जो लोगों को शुद्ध पेयजल देने के लिए बनाई गई थी, आज खुद बीमारी का ज़रिया बनती दिख रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क पर हमेशा नाले का गंदा पानी जमा रहता है। उसी सड़क के बीचों-बीच नल-जल योजना की पाइपलाइन टूटी पड़ी है। जब सप्लाई का दबाव कम होता है, तो रिवर्स सिस्टम के तहत नाले का पानी पाइप के अंदर घुस जाता है। मतलब साफ है जिस नल से पीने का पानी आना चाहिए, उसी नल से जहर उतरने की पूरी आशंका है।
यह सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का मामला है। सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक नल-जल की पाइपलाइन सड़क से कम से कम 6 इंच नीचे बिछाई जानी चाहिए और उसके ऊपर ढलाई अनिवार्य होती है। लेकिन वार्ड-10 में पाइप सड़क के ऊपर ही बाहर पड़ा है। गाड़ियों के दबाव से पाइप टूट रहा है और नाले का गंदा पानी सीधे उसमें समा रहा है। यह खुली लापरवाही किसी दिन बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है।
हैरानी की बात यह है कि हाल ही में इंदौर में गंदा पानी पीने से 10 लोगों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया, फिर भी बड़हिया नगर परिषद पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। न तो पाइपलाइन दुरुस्त कराई गई, न ही पानी की गुणवत्ता की जांच। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अफसर खामोशी की चादर ओढ़े बैठे हैं।
स्थानीय नागरिकों में गुस्सा और डर दोनों है। लोगों का कहना है कि वे पानी का टैक्स नियमित रूप से देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें साफ पानी नहीं, बल्कि बीमारी का खतरा मिल रहा है। सवाल सीधा है जब नगर परिषद टैक्स वसूल रही है, तो क्या स्वच्छ और सुरक्षित पानी देना उसकी जिम्मेदारी नहीं?
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर परिषद किसी जानलेवा हादसे के इंतजार में है? या फिर जिम्मेदार अधिकारी यूं ही कागज़ी दावों और खोखले आश्वासनों से काम चलाते रहेंगे? अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी दिन पूरे सिस्टम पर भारी पड़ सकती है।
रिपोर्ट- कमलेश कुमार सिंह