प्राइवेट नंबर प्लेट पर सरकारी सफर: मधेपुरा सिविल सर्जन की गाड़ी पर उठे गंभीर सवाल
Madhepura : बिहार का मधेपुरा स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला किसी मेडिकल लापरवाही का नहीं, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर सरकारी सफर करने का है। मधेपुरा के सिविल सर्जन (CS) पर आरोप लगा है कि वे अपने दैनिक सरकारी कार्यों और दौरों के लिए एक प्राइवेट नंबर प्लेट वाली गाड़ी का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मामले के सामने आने के बाद जिले के प्रशासनिक हलकों और आम जनता के बीच चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
कॉमर्शियल टैक्स चोरी की आशंका, लोगों में भारी चर्चा
स्थानीय नागरिकों और जानकारों के बीच इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि आखिर एक जिम्मेदार जिला स्तरीय अधिकारी सरकारी कार्य के लिए निजी वाहन (प्राइवेट रजिस्ट्रेशन) का उपयोग क्यों कर रहे हैं? नियमों के अनुसार, सरकारी अधिकारियों के आधिकारिक दौरों के लिए या तो विभागीय वाहन आवंटित होते हैं या फिर कॉमर्शियल (पीली नंबर प्लेट) वाहनों को अनुबंध पर लिया जाता है। सिविल सर्जन द्वारा सफेद नंबर प्लेट की निजी गाड़ी का लगातार इस्तेमाल करना सरकार को मिलने वाले कॉमर्शियल टैक्स और परिवहन नियमों की सीधे तौर पर अनदेखी को दर्शाता है।
क्या कहते हैं परिवहन नियम?
परिवहन मामलों के जानकारों का कहना है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी निजी वाहन (प्राइवेट कार) का उपयोग नियमित रूप से व्यावसायिक या सरकारी कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता। यदि कोई वाहन सरकारी विभाग में सेवा दे रहा है, तो उसका कॉमर्शियल पंजीकरण होना अनिवार्य है, जिसके लिए अलग टैक्स प्रक्रिया होती है। सीएस द्वारा प्राइवेट गाड़ी का उपयोग किए जाने से यह साफ तौर पर नियमों का उल्लंघन है, जिससे वित्तीय विसंगति की बू आ रही है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने खोला मोर्चा, जांच की मांग
मामला तूल पकड़ते ही जिले के विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि परिवहन विभाग आम जनता से नियम पालन के नाम पर भारी जुर्माना वसूलता है, लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग के मुखिया ही सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला अधिकारी (डीएम) से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सफाई और कार्रवाई का इंतजार
"प्राइवेट नंबर प्लेट पर सरकारी सफर" का यह मामला अब मधेपुरा में टॉक ऑफ द टाउन बन चुका है। इस गंभीर विसंगति पर अब तक स्वास्थ्य विभाग या खुद सिविल सर्जन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या सफाई सामने नहीं आई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश देता है या फिर रसूख के चलते इस पूरे खेल पर पर्दा डाल दिया जाता है।
धीरज की रिपोर्ट