Bihar News : मोतिहारी में मातम में बदली होली की खुशियाँ, नदी में डूबने से 6 बच्चों की दर्दनाक मौत, एक ही परिवार की तीन सगी बहनें भी शामिल

MOTIHARI : पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले के केसरिया थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ होली के त्योहार की खुशियाँ अचानक चीख-पुकार और मातम में बदल गईं। लोहरगवा पंचायत के राघवा नदी में डूबने से छह बच्चों की मौत हो गई है। इस सामूहिक हादसे की सूचना मिलते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। देखते ही देखते नदी घाट पर हजारों ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और हर तरफ परिजनों की चित्कार सुनाई देने लगी।

हादसे के कारणों पर विरोधाभास: स्नान या बकरी चराने के दौरान हुआ हादसा?

घटना के वास्तविक कारणों को लेकर ग्रामीणों के बीच अलग-अलग चर्चाएं हैं। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे नदी किनारे बकरी चराने गए थे और इसी दौरान पैर फिसलने से गहरे पानी में चले गए। वहीं, कुछ अन्य लोगों के अनुसार, ग्रहण खत्म होने के बाद नदी में स्नान करने के दौरान यह हादसा हुआ। हालांकि, प्रशासन इन दावों की जांच कर रहा है, लेकिन एक साथ छह बच्चों की जान जाने से पूरा इलाका सदमे में है।

तीन सगी बहनों की एक साथ गई जान

इस त्रासदी में सबसे ज्यादा कहर एक ही परिवार पर टूटा है। मृतकों में तीन सगी बहनें शामिल हैं, जिनकी पहचान 12 वर्षीय दीक्षा कुमारी, 9 वर्षीय सोनाली कुमारी और 6 वर्षीय प्रिया कुमारी के रूप में हुई है। एक ही आंगन से तीन मासूम बेटियों की अर्थी उठने की खबर ने हर किसी की आंखों में आंसू ला दिए हैं। इनके अलावा, अन्य मृतकों में 12 वर्षीय सोनाली कुमारी (एक अन्य बच्ची), 8 वर्षीय प्रिंस कुमार और छोटी कुमारी शामिल हैं।

मौके पर पहुँचे प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस टीम

हादसे की जानकारी मिलते ही केसरिया थाना की पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम तत्काल घटना स्थल पर पहुँची। ग्रामीणों की मदद से सभी बच्चों के शवों को नदी से बाहर निकाला गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया और सरकारी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है।

इलाके में पसरा सन्नाटा, घरों में नहीं जले चूल्हे

होली के दिन हुई इस बड़ी घटना ने पूरे केसरिया प्रखंड को झकझोर कर रख दिया है। लोहरगवा पंचायत के घरों में जहाँ सुबह रंग और गुलाल की तैयारी थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त करते हुए प्रशासन से नदी घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। 

हिमांशु की रिपोर्ट