Bihar News : मोतिहारी में चुनावी शिलान्यास का खुला खेल, आचार संहिता से पहले लगा बोर्ड, 4 महीने बाद भी काम का अता-पता नहीं

MOTIHARI : बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री द्वारा सड़कों के गड्ढों की फोटो भेजने पर पांच हजार रुपये के इनाम की घोषणा के बीच, मोतिहारी जिले की एक सड़क इन दिनों चर्चा और उपहास का विषय बनी हुई है। संग्रामपुर-वरियरिया वाया इन्द्रगछी-विंदवलिया होते हुए अरेराज जाने वाली यह सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। सड़क की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहाँ यह भेद करना कठिन है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच कहीं सड़क बची है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकार की इनाम वाली योजना यहाँ के लिए एक क्रूर मजाक जैसी प्रतीत होती है।

यह सड़क केवल एक संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि प्रसिद्ध सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। उत्तर प्रदेश, वैशाली और साहेबगंज जैसे सुदूर क्षेत्रों से श्रद्धालु बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि और फागुनी तेरस के मेलों में इसी मार्ग से बाबा के जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। 'तीर्थ की राह' कही जाने वाली यह सड़क अब 'हिचकोले वाली राह' बन चुकी है, जहाँ पैदल चलना भी दूभर है। बहादुरपुर नहर के समीप सड़क की स्थिति इतनी भयावह है कि आए दिन ऑटो पलटने से श्रद्धालु और राहगीर गंभीर रूप से जख्मी हो रहे हैं।

विभागीय कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल इसके शिलान्यास को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के दिन आनन-फानन में सड़क निर्माण का शिलान्यास पट लगा दिया गया। चुनावी वादा पूरा होने की उम्मीद में ग्रामीण खुश तो हुए, लेकिन यह खुशी अल्पकालिक साबित हुई। शिलान्यास के चार महीने बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू होना तो दूर, कार्यस्थल पर निर्माण सामग्री की एक ईंट तक नहीं गिराई गई है।

सड़क की जर्जरता का खामियाजा न केवल श्रद्धालुओं को, बल्कि क्षेत्र के स्कूली बच्चों और गंभीर मरीजों को भी भुगतना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस का समय पर पहुंचना नामुमकिन हो गया है। स्थानीय निवासी सत्येंद्र कुमार, अर्जुन पटेल और दयासिंधु सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों के समय से यह मार्ग तीर्थयात्रा के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन आज इसकी दुर्दशा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्रामीण कार्य विभाग की इस सुस्ती ने सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है।

प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही का आलम यह है कि ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालय जाने पर कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं मिलता। इस गंभीर समस्या को लेकर जब विभाग के कार्यपालक अभियंता (स्कूटी इंजीनियर) से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका मोबाइल फोन लगातार बंद पाया गया। अधिकारियों और संवेदक की इस "कुंभकर्णी नींद" ने इलाके के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

हिमांशु की रिपोर्ट