Bihar News : मोतीहारी में खाद की कालाबाजारी पर विवाद, पुलिस का दावा- 146 बोरी DAP ज़ब्त, कृषि विभाग बोला- '5-6 बोरी का अंतर बड़ी बात नहीं'

Bihar News : मोतिहारी के छौड़ादानो में डीएपी जब्ती मामले को लेकर पुलिस और कृषि अधिकारी के बयानों में भारी विरोधाभास है. जिससे विभाग अब सवालों के घेरे में है......पढ़िए आगे

पुलिस और विभाग में विरोधाभास - फोटो : HIMANSHU

MOTIHARI : पूर्वी चंपारण जिले में खरीफ सीजन के चरम पर पहुँचने के साथ ही खाद की किल्लत और कालाबाजारी चरम पर है। एक तरफ जहाँ किसान उचित मूल्य पर खाद पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी निरोधी एजेंसियों और पुलिस की मुस्तैदी के दावों के बावजूद किसानों का आरोप है कि उन्हें काफी दौड़-धूप के बाद भी सरकारी दर से काफी महंगे दामों पर खाद मिल पा रही है।

इन गंभीर आरोपों के बीच बीते शुक्रवार को पूर्वी चंपारण के छौड़ादानो थाना क्षेत्र स्थित आदर्श नगर के एक गोदाम में पुलिस और प्रखंड कृषि पदाधिकारी की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। छापेमारी के बाद पुलिस ने दावा किया कि मौके से 146 बोरी डीएपी उर्वरक जब्त की गई है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालाँकि, जब इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी से फोन पर पूछा गया, तो उन्होंने मामले को हल्का बताते हुए कहा कि केवल 5-6 बोरी का अंतर पाया गया है और इतना अंतर होना कोई बड़ी बात नहीं है।

इधर, रविवार को इस विरोधाभास पर छौड़ादानो थानाध्यक्ष प्रभात कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर ही यह संयुक्त कार्रवाई की गई थी। सूचना मिली थी कि आदर्श नगर स्थित गोदाम में कालाबाजारी की नीयत से बड़े पैमाने पर उर्वरक का भंडारण किया गया है। छापेमारी में 146 बोरी डीएपी बरामद कर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया गया था। हालाँकि, थानाध्यक्ष ने यह भी खुलासा किया कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी कृषि विभाग की ओर से थाने में कोई लिखित शिकायत या आवेदन नहीं दिया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी निर्भय कुमार मिश्र ने बताया कि वे अनुमंडल में मौजूद नहीं हैं और विभागीय काम से पटना गए हुए हैं। अधिकारियों की इस टालमटोल की वजह से मामले को लेकर संशय और गहराता जा रहा है।

पुलिस द्वारा भारी मात्रा में डीएपी उर्वरक की जब्ती के दावे और दूसरी तरफ कृषि विभाग द्वारा इसे महज़ मामूली अंतर बताकर क्लीनचिट देने के रवैये पर स्थानीय लोगों और किसानों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। क्षेत्र में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि आखिर कृषि विभाग पुलिस के दावों और बरामदगी को क्यों खारिज कर रहा है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने कृषि विभाग की कार्यशैली और खाद की कालाबाजारी रोकने के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

हिमांशु की रिपोर्ट