मुंगेर सदर अस्पताल में नवजात की मौत पर भारी हंगामा: परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाया दुर्व्यवहार और लापरवाही का आरोप
Bihar News : मुंगेर सदर अस्पताल में आज भारी हंगामा हुआ। एक नवजात की मौत के बाद परिजन भड़क गए और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया...
Munger : सदर अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में एक नवजात की मौत के बाद शनिवार को अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। बच्चे की मौत से आक्रोशित परिजनों ने इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस को मौके पर पहुँचना पड़ा, जिसके बाद मामले को शांत कराया गया। पुलिस ने परिजनों को लिखित आवेदन देने को कहा है ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
घटना के संदर्भ में बताया जा रहा है कि खड़गपुर निवासी मनीषा कुमारी ने गुरुवार को एक बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के वक्त शिशु की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे खड़गपुर अनुमंडल अस्पताल से मुंगेर सदर अस्पताल रेफर किया गया था। परिजनों के अनुसार, 30 अप्रैल को भर्ती के वक्त बच्चे की हालत सामान्य बताई गई थी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी स्थिति बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने उसे 'चमकी' बीमारी बताकर मामले को टालने की कोशिश की और समय रहते न तो इलाज बेहतर किया और न ही कहीं और रेफर किया।
अचानक मौत की खबर पर भड़के परिजन
शनिवार की सुबह हंगामा तब शुरू हुआ जब परिजनों को अचानक बच्चे की मौत की सूचना मिली। परिजनों का गंभीर आरोप है कि रात के समय वार्ड में सही निगरानी नहीं रखी गई और हीटर के अत्यधिक उपयोग के कारण बच्चे की स्थिति बिगड़ गई। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि जब नवजात की हालत गंभीर हो रही थी, तो इसकी जानकारी समय रहते परिवार को क्यों नहीं दी गई? आज सुबह पहले हालत ठीक बताई गई और फिर अचानक उसे मृत घोषित कर दिया गया, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा गया है।
अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप
पीड़ित परिवार ने न केवल इलाज में लापरवाही, बल्कि नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार पर भी कड़े सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने उनके साथ बदसलूकी की और विरोध करने पर मुक्का दिखाते हुए धमकी भी दी। परिजनों ने स्पष्ट तौर पर दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण ही उन्होंने अपने बच्चे को खोया है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में परिजनों द्वारा कोतवाली थाने में लिखित आवेदन दे दिया गया है। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है या हर बार की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं और स्टाफ की नैतिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
इम्तियाज खान की रिपोर्ट