Bihar News : तिरहुत क्षेत्र के शिक्षकों के लिए बड़ी पहल, अभिषेक झा ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर, सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने गिनाईं नीतीश सरकार की उपलब्धियाँ
Bihar News : तिरहुत क्षेत्र के शिक्षकों के लिए अभिषेक झा की ओर से हेल्पलाइन की शुरुआत की गयी है. जिसपर कोई शिक्षक अपनी समस्या को रख सकता है......पढ़िए आगे
MUZAFFARPUR : शहर के एक स्थानीय होटल में रविवार को सीतामढ़ी सांसद, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चार बार विधान परिषद रहे,विधान परिषद के पूर्व सभापति देवेश चंद्र ठाकुर, जदयू प्रवक्ता एवं तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व एनडीए प्रत्याशी अभिषेक झा, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी आनंद पुष्कर, मुजफ्फरपुर पूर्वी जिला भाजपा के अध्यक्ष विवेक कुमार,रालोमो के वरिष्ठ नेता ठाकुर धर्मेंद्र,जदयू नेता शब्बीर ने संयुक्त रूप से प्रेस के साथियों को संबोधित किया। इस मौके पर तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के सम्मानित शिक्षकों की समस्याओं के समाधान हेतु जदयू प्रवक्ता एवं तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व एनडीए प्रत्याशी अभिषेक झा की तरफ से एक हेल्पलाइन नंबर जारी की गई। क्षेत्र के शिक्षक और शिक्षिका अपनी किसी भी समस्या की जानकारी सोमवार से शनिवार तक सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 6:00 बजे तक इस नंबर पर फोन कर दर्ज करा सकते हैं। अभिषेक झा ने बताया कि संबंधित कार्यालय से बात कर उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक पहल होगी। इसके अलावा जिला प्रशासन की तरफ से शिक्षकों की समस्या के निवारण हेतु हर महीने कैंप भी लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि बिहार में शिक्षा क्रांति के जनक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, शिक्षकों को सम्मान देने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले दो दशकों में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। वर्ष 2005 में सरकार बनने के बाद से शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार, विस्तार और संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। सबसे पहले वर्ष 2006 में 11 माह के अस्थायी अनुबंध पर कार्य कर रहे लाखों शिक्षामित्रों को पंचायत स्तर पर ही लगभग 60 वर्षों के लिए स्थायी करते हुए उन्हें बड़ी राहत दी गई। यह शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिससे हजारों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हुआ और विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था मजबूत हुई। इसके बाद वर्ष 2006 से 2010 के बीच स्थानीय निकाय के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षकों की बहाली की गई। वर्ष 2011-12 में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित की गई, जिसका परिणाम 14 मई 2012 को जारी हुआ। इस परीक्षा में लगभग 26.79 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, जिनमें से लगभग 1.47 लाख (करीब 1,47,984) अभ्यर्थी सफल हुए। विभागीय आंकड़ों के अनुसार कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक) के लिए लगभग 60,730 तथा कक्षा 6 से 8 (उच्च प्राथमिक) के लिए लगभग 87,254 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। इन सफल अभ्यर्थियों की विभिन्न चरणों में बहाली की गई, जिससे राज्य के विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
शिक्षक नेता आनंद पुष्कर ने कहा कि वर्ष 2015 में नियोजित शिक्षकों को वेतनमान दिया गया तथा वर्ष 2020 में सेवा शर्त, स्थानांतरण और प्रोन्नति (प्रमोशन) की व्यवस्था लागू की गई, जिससे शिक्षकों को संस्थागत सम्मान और बेहतर कार्य वातावरण मिला। वर्ष 2021-22 में भी TET शिक्षकों की बहाली की गई, जिससे शिक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिली। वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए शिक्षकों को पंचायती राज व्यवस्था से अलग कर उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान किया। इसके बाद शिक्षक “विशिष्ट शिक्षक” और “विद्यालय अध्यापक” के रूप में कार्य कर रहे हैं। पारदर्शी व्यवस्था के तहत बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित कर बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गईं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिला और विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर हुआ।
अभिषेक झा ने कहा कि शिक्षा बजट की बात करें तो वर्ष 2005 में बिहार का शिक्षा बजट लगभग 4,366 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर आज लगभग 68 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह राज्य के कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत है, जिससे बिहार शिक्षा पर सबसे अधिक खर्च करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्य में बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापकों की बहाली, नए विद्यालय भवनों का निर्माण, हर पंचायत में उच्च विद्यालय खोलने की पहल तथा प्लस-टू विद्यालयों का विस्तार किया गया है। कहा की विद्यार्थियों के हित में भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं, जिनमें मुख्य रूप से बालिकाओं के लिए साइकिल योजना, पोशाक योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, मध्याह्न भोजन योजना का विस्तार, स्वास्थ्य एवं वेलनेस शिक्षा की शुरुआत और गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए आर्थिक सहायता शामिल है। झा ने कहा की इन योजनाओं से विद्यालयों में नामांकन दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा को नई गति मिली। केवल स्कूल शिक्षा ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, मेडिकल कॉलेजों और डिग्री कॉलेजों की संख्या में लगातार वृद्धि की गई है, जिससे बिहार के युवाओं को राज्य में ही बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
वहीँ विवेक ने बताया कि यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आया है। शिक्षकों का सम्मान बढ़ा है, छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिली हैं और युवाओं के लिए शिक्षा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। ठाकुर धर्मेंद्र ने कहा कि शिक्षकों की समस्या के समाधान की दिशा में यह पहल सराहनीय है और बहुत चुनौती पूर्ण है। शब्बीर ने अभिषेक झा की पहल के लिए उनके प्रति अपना आधारित किया। इस मौके पर पूरे तिरहुत प्रमंडल के हर जिले से सैकड़ो की संख्या में सम्मानित शिक्षकों की उपस्थिति रही।