Bihar News: होली से पहले मुजफ्फरपुर में शराब के समंदर पर छापा, 20 दिनों में 42,000 लीटर बरामद, क्या बिहार में कागजों पर है शराबबंदी?
Bihar News: रंगों के त्योहार होली की आहट आते ही शराब माफियाओं की हरकतें शबाब पर हैं। लेकिन इस बार मुजफ्फरपुर पुलिस ताबड़तोड़ एक्शन ने माफियाओं के तिलिस्म को तार-तार कर दिया है।...
Muzaffarpur: रंगों के त्योहार होली की आहट आते ही बिहार के मुजफ्फरपुर में शराब माफियाओं की 'हरकतें' शबाब पर हैं। लेकिन इस बार मुजफ्फरपुर पुलिस और उत्पाद विभाग के ताबड़तोड़ एक्शन ने माफियाओं के तिलिस्म को तार-तार कर दिया है। जिलाधिकारी सुव्रत कुमार सेन और एसएसपी कांतेश कुमार (वरीय पुलिस अधीक्षक) के कड़े निर्देशों के बाद, महज 20 दिनों के भीतर जिले में 42,000 लीटर से अधिक देशी-विदेशी शराब और स्प्रिट की बरामदगी ने पूरे सूबे में खलबली मचा दी है। एसएसपी कान्तेश कुमार मिश्र ने आंकड़ों की तस्दीक करते हुए बताया कि पिछले 20 दिनों में पुलिसिया कार्रवाई किसी 'जलजले' से कम नहीं थी।
बरामदगी का ब्योरा: पुलिस ने कुल 17,184 लीटर शराब जब्त की, जिसमें 13,739 लीटर विदेशी शराब और 2,926 लीटर स्प्रिट शामिल है।
कानूनी शिकंजा: इस दौरान 116 एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज की गई और तस्करी में शामिल 30 वाहनों को जप्त किया गया।
दूसरी तरफ, उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने जो आंकड़े पेश किए, वे और भी चौंकाने वाले हैं। उत्पाद विभाग ने विशेष अभियान के तहत 143 मामले दर्ज कर 196 तस्करों को 'सलाखों' के पीछे भेजा है। विभाग ने 18,224 लीटर देशी/चुलाई शराब और 6,361 लीटर विदेशी शराब के साथ एक गोदाम को भी सील किया है।
इस भारी बरामदगी ने बिहार में लागू शराबबंदी की हकीकत पर एक बड़ा सवालिया निशान चस्पा कर दिया है।
बड़ा सवाल है कि अगर सिर्फ 20 दिनों में मुजफ्फरपुर जैसे एक जिले में इतनी बड़ी खेप पकड़ी गई है, तो अंदाजा लगाइए कि कितनी शराब बिना रोक-टोक के खप चुकी होगी? आखिर चेकपोस्टों और सरहदों को पार कर ये मौत का सामान मुजफ्फरपुर के दिल तक कैसे पहुँच रहा है?
शराबबंदी को लेकर अब न सिर्फ विपक्ष हमलावर है, बल्कि सत्ता पक्ष के गलियारों से भी इसे लेकर पुनर्विचार की आवाजें उठने लगी हैं। क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शराबबंदी की नीति की नए सिरे से समीक्षा करने की जरूरत है? जनता के बीच यह चर्चा आम है कि जब तक सप्लाई चेन पर अंकुश नहीं लगेगा, तब तक ऐसी गिरफ्तारियां महज एक रस्म बनकर रह जाएंगी।
रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा