Bihar News:विकास की दुहाई, बदबू की मार, सुधा डेयरी प्लांट के गंदे पानी से लोगों का जीना हुआ दुश्वार

Bihar News:Sudha Dairy प्लांट से निकलने वाला वेस्टेज और बदबूदार पानी अब आसपास के मोहल्लों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है।

धा डेयरी प्लांट के गंदे पानी से लोगों का जीना हुआ दुश्वार- फोटो : reporter

Muzaffarpur: जिले के कांटी प्रखंड के सादतपुर में स्थित Sudha Dairy प्लांट से निकलने वाला वेस्टेज और बदबूदार पानी अब आसपास के मोहल्लों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। विकास और उद्योग की सियासत के बीच आम अवाम की सेहत और सुकून का मुद्दा हाशिये पर दिख रहा है। स्थानीय लोगों का इल्ज़ाम है कि प्लांट से बहने वाला गंदा पानी नालियों और खाली ज़मीनों में जमा होकर जहरीली बदबू फैलाता है, जिससे बच्चों और बुज़ुर्गों की तबीयत पर बुरा असर पड़ रहा है।

मोहल्लावासियों का कहना है कि वे कई बार डेयरी प्रबंधन, स्थानीय विधायक और नगर निगम के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। अर्ज़ियाँ दी गईं, गुहार लगाई गई, मगर संज्ञान की सियासत खामोश रही। नतीजा यह कि लोग नारकीय हालात में जीने को मजबूर हैं। जिन परिवारों ने ग्रामीण ज़मीन बेचकर शहर में आशियाना बसाया, वही आज अपने घरों से बेदख़ल जैसे हालात में हैं। करोड़ों की पूंजी लगाकर बनाए गए मकान बदबू और जलजमाव के कारण सूने पड़े हैं, और कई परिवार किराये के मकानों में शरण लेने को विवश हैं।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, जलजमाव के चलते मच्छरों का आतंक बढ़ गया है, डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का ख़तरा मंडरा रहा है, और जहरीले जीव-जंतु अक्सर दिखाई देते हैं। बच्चों का बाहर निकलना दूभर हो गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या औद्योगिक विकास की कीमत आम जनता अपनी सेहत और घर-बार से चुकाए?

प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे पर सख़्त कार्रवाई की चर्चाएँ तो होती हैं, मगर ज़मीन पर राहत नदारद है। लोग पूछ रहे हैं अगर न डेयरी प्रबंधन सुन रहा, न जनप्रतिनिधि, न नगर निगम तो फरियाद लेकर जाएँ कहाँ? विकास की राजनीति तभी मुकम्मल मानी जाएगी जब उद्योग के साथ पर्यावरणीय जवाबदेही और नागरिकों की सेहत की हिफ़ाज़त भी सुनिश्चित हो। सादतपुर की यह कहानी अब एक स्थानीय शिकायत नहीं, बल्कि जवाबदेही की सियासत का बड़ा इम्तिहान बन चुकी है।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा