Bihar Road Accident: सड़क पर मौत का तांडव, तेज़ रफ्तार ने छीनी दो जिगरी दोस्तों की सांसें, पिकअप की टक्कर से दो और जख्मी
Bihar Road Accident: नालंदा जिले की सड़क एक बार फिर खून से लाल हो गई।
Bihar Road Accident: नालंदा जिले में मंगलवार की देर शाम सड़क एक बार फिर खून से लाल हो गई। सरमेरा थाना क्षेत्र के बड़ी मिसियां गांव स्थित पेट्रोल पंप के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने इलाके को दहला कर रख दिया। तेज़ रफ्तार और लापरवाही का ऐसा क़हर टूटा कि दो जिगरी दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवक गंभीर रूप से जख्मी हो गए। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में मातम और अफरातफरी का माहौल कायम हो गया।
मृतकों की पहचान पटना जिले के घोसवरी थाना क्षेत्र अंतर्गत झुनकी गांव निवासी अशोक राम के 23 वर्षीय पुत्र मन्नु कुमार और नवीन चौहान के 20 वर्षीय पुत्र पुष्पंजय कुमार के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि दोनों दोस्त रोज़मर्रा की तरह बाइक से निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर आख़िरी साबित होगा।
हादसे में घायल सरमेरा थाना क्षेत्र के बड़ी मलावां गांव निवासी श्रवण कुमार और धीरज कुमार को आनन-फानन में सदर अस्पताल लाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद धीरज की हालत नाज़ुक देख उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक एक घायल की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि चारों युवक एक ही बाइक पर सवार थे और घोसवरी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान तेज़ रफ्तार पिकअप वाहन ने उन्हें ज़ोरदार टक्कर मार दी। हालांकि, मृतकों के परिजनों का दावा कुछ और ही कहानी बयां करता है। परिजनों के मुताबिक मन्नु और पुष्पंजय बाइक पर बैठे थे, जबकि श्रवण और धीरज सड़क किनारे खड़े होकर उनसे बातचीत कर रहे थे। तभी एक अज्ञात वाहन चारों को कुचलता हुआ मौके से फरार हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही सरमेरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष साकेंद्र कुमार बिंद ने बताया कि यह एक गंभीर सड़क दुर्घटना है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और फरार वाहन की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। नालंदा की सड़कों पर मौत का यह मंजर कब थमेगा, यह सवाल आज हर किसी की ज़ुबान पर है।
रिपोर्ट- राज पाण्डेय