Bihar News : बिहार में 100 से अधिक बंद पड़े इंडस्ट्रियल यूनिट फिर होंगे चालू, 800 करोड़ निवेश का साफ हुआ रास्ता
Bihar News : बिहार में बंद पड़े 100 से अधिक इंडस्ट्रियल यूनिट को फिर से चालू किये जायेंगे. इनमें 8 सौ करोड़ के निवेश का रास्ता साफ़ हो गया है......पढ़िए आगे
PATNA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली 'डबल इंजन' सरकार ने बिहार में औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (बियाडा) ने अपनी नई 'एमनेस्टी पॉलिसी-2025' और 'एग्जिट पॉलिसी-2025' के जरिए राज्य की बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों (Industrial Units) को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विवादों में फंसी इकाइयों को सुलझाना और राज्य में निवेश के लिए नई जमीन उपलब्ध कराना है।
विवादों का अंत और जमीन की उपलब्धता
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस प्रभावी नीति के लागू होने से अब तक लगभग 100 इंडस्ट्रियल यूनिट्स के पुराने विवादों को सुलझाया जा चुका है। इसके साथ ही, लगभग 100 एकड़ औद्योगिक भूमि को फिर से निवेश के लिए तैयार कर लिया गया है। यह जमीन उन निवेशकों को दी जाएगी जो राज्य में नए उद्योग स्थापित करने के इच्छुक हैं, जिससे निष्क्रिय पड़ी संपत्तियों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
800 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना
उद्योग विभाग के सचिव सह बियाडा के एमडी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विभागीय आकलन के अनुसार, इन बंद पड़ी यूनिट्स के दोबारा सक्रिय होने से बिहार में 600 से 800 करोड़ रुपये के नए निवेश का रास्ता साफ होगा। इस भारी-भरकम निवेश से न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे।
31 मार्च तक आवेदन का मौका
राज्य सरकार ने बंद पड़े कारखानों के मालिकों और योग्य आवेदकों के लिए एक समय सीमा निर्धारित की है। जो भी उद्यमी अपनी इकाइयों को दोबारा शुरू करना चाहते हैं या इस पॉलिसी का लाभ उठाना चाहते हैं, वे 31 मार्च तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य इस 'विंडो' के जरिए औद्योगिक रुकावटों को खत्म कर बिहार को एक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना है।
औद्योगिक क्रांति को नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि एमनेस्टी और एग्जिट पॉलिसी बिहार में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देगी। बंद पड़े कारखानों के चालू होने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बिहार की औद्योगिक छवि में भी व्यापक सुधार होगा। सरकार की यह दूरदर्शी सोच प्रदेश में औद्योगिक क्रांति को एक नया आयाम प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।