पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली का वीडियो वायरल, SP ने दिए जांच के आदेश

नवगछिया स्थित महादेवपुर घाट पर पार्किंग शुल्क के नाम पर कथित तौर पर की जा रही अवैध वसूली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला सामने आने के बाद एसपी ने इसके जांच के आदेश दिए है.....

पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली - फोटो : धीरज पराशर

Naugachia : पुलिस जिला नवगछिया स्थित महादेवपुर घाट पर पार्किंग शुल्क के नाम पर कथित तौर पर की जा रही अवैध वसूली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने पार्किंग के नाम पर हो रही इस जबरन वसूली पर कड़ा ऐतराज जताया है।


पूर्व विधायक के भाई ने थाना प्रभारी के निर्देश का दिया हवाला

वायरल वीडियो में पूर्व विधायक गोपाल मंडल के भाई अनिल मंडल बताए जा रहे व्यक्ति को यह दावा करते सुना जा सकता है कि यह पार्किंग स्थल इस्माइलपुर थाना प्रभारी के निर्देश पर बनाया गया है। वीडियो में वह यह भी कहते दिख रहे हैं कि थाना प्रभारी की हिदायत के अनुसार ही प्रत्येक वाहन चालक से 50 पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है।


इस्माइलपुर थाना प्रभारी ने दावों को किया खारिज

दूसरी ओर, इस मामले में इस्माइलपुर थाना प्रभारी ने अनिल मंडल द्वारा किए गए दावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कथित वसूली से उनका या पुलिस प्रशासन का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने वीडियो में लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खुद को इस पूरे प्रकरण से पूरी तरह अलग बताया है।


रोजाना एक हजार से अधिक वाहनों से वसूली का आरोप

स्थानीय सूत्रों और पीड़ितों के अनुसार, महादेवपुर घाट पर रोजाना आने-जाने वाले एक हजार से अधिक वाहनों से 50 प्रति मोटरसाइकिल की दर से पर्ची काटकर पार्किंग शुल्क वसूला गया है। इस प्रकार हर दिन पार्किंग के नाम पर मोटी रकम की अवैध वसूली किए जाने का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है।


पुलिस कप्तान ने जांच का दिया भरोसा, कार्रवाई पर टिकी नजरें

मामला संज्ञान में आते ही नवगछिया के पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। अब इस वायरल वीडियो और एसपी के आश्वासन के बाद स्थानीय जनता और वाहन चालकों की नजरें पुलिसिया कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस अवैध वसूली गिरोह पर क्या कदम उठाया जाता है।

धीरज पराशर की रिपोर्ट