नवादा सदर अस्पताल में अवैध प्राइवेट एंबुलेंसों पर बड़ी कार्रवाई, डीएम के निर्देश पर हुई छापेमारी

Bihar News : अवैध रूप से जमे प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों और मरीजों को गुमराह करने वाले गिरोह के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। आज जिला प्रशासन द्वारा सदर अस्पताल काऔचक निरीक्षण कर इनपर कार्रवाई की गई...

सदर अस्पताल परिसर में अवैध रूप से जमे प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों पर प्रशासन की कार्रवाई- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : सदर अस्पताल परिसर में अवैध रूप से जमे प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों और मरीजों को गुमराह करने वाले गिरोह के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिलाधिकारी रवि प्रकाश के निर्देश पर गठित एक विशेष टीम ने बुधवार को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई से अस्पताल परिसर और उसके आसपास अवैध रूप से वाहन खड़े करने वाले संचालकों में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच निजी हितों का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


एसडीओ और डीटीओ ने खुद संभाली कमान 

डीएम के आदेश पर सदर एसडीओ अमित अनुराग और जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) नवीन पांडे ने संयुक्त रूप से अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने केवल वाहनों की जांच ही नहीं की, बल्कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से भी सीधा संवाद किया। जांच टीम यह जानना चाहती थी कि क्या बाहरी लोग मरीजों को निजी क्लीनिक या निजी एंबुलेंस सेवाओं के लिए मजबूर तो नहीं कर रहे हैं। निरीक्षण के समय डीपीएम अमित कुमार भी मौजूद रहे।


निजी एंबुलेंसों पर लगा जुर्मानाकाटे गए चालान 

जांच के दौरान टीम ने पाया कि अस्पताल कैंपस के भीतर एक प्राइवेट एंबुलेंस अनाधिकृत रूप से खड़ी थी, जबकि मुख्य गेट के बाहर दो-तीन अन्य निजी एंबुलेंसों का जमावड़ा लगा था। इन वाहनों के कारण एंबुलेंस लेन में बाधा उत्पन्न हो रही थी। डीटीओ नवीन पांडे ने नियमों का उल्लंघन करने वाली इन सभी एंबुलेंसों पर भारी जुर्माना लगाया और मौके पर ही चालान जारी किया। एसडीओ ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद सभी 10 एंबुलेंस अपने स्थान पर सही पाई गईं, लेकिन निजी वाहनों का प्रवेश वर्जित किया गया है।


मरीजों को गुमराह करने की मिली थी शिकायत 

सदर एसडीओ अमित अनुराग ने बताया कि जिला पदाधिकारी को लगातार यह सूचना मिल रही थी कि प्राइवेट एंबुलेंस संचालक सदर अस्पताल के भीतर सक्रिय हैं। ये लोग अक्सर गंभीर मरीजों के परिजनों को बहला-फुसलाकर या डराकर अपनी सेवाएं थोपते थे, जिससे मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता था। इसी शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच के आदेश दिए थे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अस्पताल परिसर में सरकारी और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है।


भविष्य में भी जारी रहेगा प्रशासनिक अभियान 

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई केवल एक दिन के लिए नहीं है। सरकारी अस्पताल की शुचिता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे औचक निरीक्षण भविष्य में भी जारी रहेंगे। एसडीओ ने कहा कि परिसर में बिना अनुमति निजी वाहनों का प्रवेश न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं में भी बाधा पैदा करता है। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई उन्हें सरकारी परिसर में गुमराह करने की कोशिश करे, तो तुरंत इसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन या प्रशासन को दें।

अमन सिन्हा की रिपोर्ट