दरोगा की वर्दी पहनने से पहले थम गई जिंदगी, दौड़ में गिरा होनहार युवक, अस्पताल पहुंचते ही मौत, परिवार में मचा कोहराम

Bihar News: जिस युवक ने खाकी वर्दी पहनकर समाज और देश की सेवा करने का सपना देखा था, उसकी जिंदगी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो गई।

दरोगा की वर्दी पहनने से पहले थम गई जिंदगी- फोटो : reporter

Nawada:  जिले से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। जिस युवक ने खाकी वर्दी पहनकर समाज और देश की सेवा करने का सपना देखा था, उसकी जिंदगी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो गई। अकबरपुर प्रखंड के कलौन्दा चातर गांव निवासी सहदेव दास के बड़े पुत्र चंदन कुमार की दौड़ अभ्यास के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई।

चंदन कुमार अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था। वह दरोगा भर्ती की तैयारी में जुटा था और उसने मेंस परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास कर ली थी। इसके अलावा रेलवे ग्रुप-डी की परीक्षा में भी उसका चयन हो चुका था। भविष्य को लेकर उसके परिवार और दोस्तों में उम्मीद की नई रोशनी जगी थी।

बताया जाता है कि चंदन ने करीब दस दिन पहले एक अकादमी में दाखिला लिया था, जहां वह नियमित रूप से दौड़ और शारीरिक प्रशिक्षण कर रहा था। सोमवार को अभ्यास के दौरान मैदान में दौड़ लगाते समय अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा।साथियों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। चंदन की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। पूरे गांव में मातम छा गया और हर आंख नम हो गई।

चंदन के दोस्त सुमित कुमार ने बताया कि वह बेहद मेहनती, लगनशील और अनुशासित युवक था। उसका सपना था कि वह दरोगा की वर्दी पहनकर लोगों की सेवा करे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।चंदन का छोटा भाई अग्निवीर के रूप में देश की सेवा कर रहा है। बड़े बेटे की असमय मौत से माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।यह दर्दनाक हादसा उन हजारों युवाओं के लिए एक मार्मिक संदेश है, जो कठिन मेहनत और संघर्ष के सहारे अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। चंदन का सपना अधूरा रह गया, लेकिन उसकी मेहनत और संघर्ष की कहानी हमेशा याद की जाएगी।

रिपोर्ट- अमन कुमार