सदन में गरजीं 'तेजस्वी की शेरनी': अनीता देवी ने खेल बजट पर सरकार को घेरा, माइक बंद होने पर भी नहीं रुकीं
अनीता देवी की इस बेबाक स्पीच का वीडियो सोशल मीडिया पर "तेजस्वी की शेरनी" कैप्शन के साथ तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थकों द्वारा उनके साहस और तेजस्वी यादव के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना की जा रही है।
Nawada - वारिसलीगंज की RJD विधायक अनीता ने बिहार विधानसभा में खेल विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान जोरदार और दमदार स्पीच दी। उन्होंने बिहार के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की जर्जर स्थिति पर तीखा हमला बोला, मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप लगाया, साथ ही पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के कार्यकाल की खेल योजनाओं की जमकर तारीफ की।
खेल सुविधाओं की बदहाली
बिहार के अधिकांश जिलों में स्टेडियम खंडहर बन चुके हैं। लाइट्स, शौचालय, जिम, प्रशिक्षण हॉल आदि की भारी कमी। कई खेल केंद्रों में प्रमाणित कोच और फिटनेस ट्रेनर नहीं हैं, आधुनिक विज्ञान-आधारित सुविधाएं नाममात्र की।
कागजी खर्च और हकीकत
सरकार फाइलों में करोड़ों रुपये खर्च का दावा करती है, लेकिन जमीन पर सिर्फ गड्ढे और अव्यवस्था दिखती है।
खिलाड़ियों का पलायन
बिहार का टैलेंट हरियाणा, पंजाब, रेलवे, आर्मी आदि में चला जाता है। मेडल जीतने पर बिहार का नाम पीछे रह जाता है।
तेजस्वी यादव के योगदान की सराहना
मेडल लो, नौकरी पाओ" योजना से खिलाड़ियों को रोजगार की गारंटी और सम्मान मिला, युवाओं में विश्वास जगा। राजगीर में खेल विश्वविद्यालय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम/स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की शुरुआत की । खेल सम्मान समारोह जहां पुरस्कार सीधे खाते में ट्रांसफर करने की व्यवस्था की। इसके साथ ही प्रखंड स्तर पर स्टेडियम निर्माण की प्राथमिकता, ताकि ग्रामीण प्रतिभाएं दूर न जाएं। खेल को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सम्मान बनाया गया; पसीने की हर बूंद का हिसाब चुकाया गया।
माइक बंद होने की घटना
जब अनीता तेजस्वी यादव की तारीफ और उनके विजन की बात कर रही थीं, तो सदन में उनका माइक कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया। वे रुकी नहीं, बोलती रहीं और नाराजगी जताई। बाद में माइक फिर चालू हुआ। उन्होंने कहा कि अब कागजों पर नहीं, मैदान में काम दिखना चाहिए। बिहार का खिलाड़ी दुनिया में नाम कमाएगा।
विपक्ष पर तंज
तर्क आंकड़ों के साथ दीजिए। तेजस्वी ने बिहार को खेलों का नया केंद्र बनाया था।
अनीता देवी ने सदन में 5 मुख्य मांगें रखीं
हर जिले में प्रमाणित कोच कितने हैं? बच्चों के लिए विशेष खेल योजना क्या है?
"मेडल लो, नौकरी पाओ" जैसी प्रभावी योजना को क्यों कमजोर किया गया?
हर पंचायत स्तर पर खेल योजना लागू हो।
बिहार में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन कब होंगे?
नवादा के मेवा लाल जैसे स्थानीय खिलाड़ियों (फुटबॉल में नाम कमाने वाले) का सम्मान और समर्थन।
यह स्पीच RJD की ओर से खेल विभाग पर हमले का हिस्सा थी। सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों में इसे "तेजस्वी की शेरनी" के रूप में वायरल किया गया, जहां अनीता को उनकी बेबाकी और तेजस्वी के प्रति निष्ठा के लिए सराहा जा रहा है। सदन में यह काफी चर्चा का विषय बना, और विपक्ष ने सरकार की खेल नीतियों पर सवाल खड़े किए।
रिपोर्ट- अमन सिन्हा