कौशल विकास केंद्र बंद होने से 10 हजार लोग बेरोजगार : पटना के नियोजन भवन में संचालकों का जोरदार हंगामा

बिहार में तकरीबन 1700 कौशल विकास केन्द्र बंद कर दिए गए है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ इन केन्द्रों के संचालकों और कर्मचारियों ने गुरुवार को पटना स्थित नियोजन भवन पहुंच जमकर हंगामा किया....

पटना के नियोजन भवन में कौशल विकास केंद्र संचालकों का जोरदार हंगामा- फोटो : अनिल कुमार

Patna : बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी सात निश्चय कार्यक्रम के तहत संचालित कौशल विकास योजना (कुशल युवा कार्यक्रम) को लेकर राज्य में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश भर में लगभग 1700 कौशल विकास केन्द्रों को बंद किए जाने के कारण इनमें काम करने वाले 10 हजार से अधिक कर्मचारी और ट्रेनर अचानक बेरोजगारी के मुहाने पर आकर खड़े हो गए हैं।


नियोजन भवन में हंगामा और मुख्य गेट बंद

इसी मुद्दे को लेकर राज्य भर से आए सैकड़ों केंद्र संचालक और कर्मचारी पटना स्थित नियोजन भवन पहुंचे और श्रम संसाधन मंत्री से मुलाकात की मांग करने लगे। आक्रोशित भीड़ के उग्र रुख को देखते हुए मंत्री की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने मुख्य द्वार को भीतर से बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रवेश द्वार के बाहर ही सरकार और विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।


वार्ता से असंतुष्ट दिखे प्रतिनिधिसुरक्षा में निकले मंत्री

स्थिति तनावपूर्ण होती देख प्रशासन ने 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मंत्री से मुलाकात करने की अनुमति दी। हालांकि, वार्ता और मंत्री के आश्वासन से प्रदर्शनकारी बिल्कुल संतुष्ट नजर नहीं आए। इसके बाद माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रम संसाधन मंत्री को नियोजन भवन से बाहर निकाला गया, जबकि प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे।


नया टेंडर निकालने और पक्षपात का आरोप

प्रदर्शनकारी संचालकों ने विभाग पर आरोप लगाया है कि सरकार पुराने केंद्रों को बंद करके दोबारा टेंडर निकालने की तैयारी कर रही है। संचालकों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए अपने चहेते और करीबी लोगों को काम आवंटित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


युवाओं के भविष्य और रोजगार पर सवाल

जिन कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से लाखों युवाओं को कंप्यूटर और सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाने का दावा किया गया था, उनके बंद होने से न केवल हजारों कर्मियों की आजीविका पर संकट आ गया है, बल्कि युवाओं का भविष्य भी अधर में लटक गया है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल पारदर्शी निर्णय लेकर बंद पड़े केंद्रों को फिर से शुरू किया जाए।


अनिल की रिपोर्ट