सामूहिक अवकाश पर गए राजस्व कर्मचारियों को 24 घंटे का अल्टीमेटम, कार्यस्थल पर नहीं लौटने पर होंगे सस्पेंड
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सामूहिक अवकाश पर गए राजस्व कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी दी है। विभाग की ओर से कहा गया है कि 24 घंटे के भीतर वे कार्यस्थल लौटें, अन्यथा उनपर निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई होगी....
Patna : बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सामूहिक अवकाश और हड़ताल पर गए राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपना लिया है। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सभी संबंधित कर्मचारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे इस आदेश के जारी होने के 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से अपने संबंधित कार्यस्थल और अंचल कार्यालय में योगदान सुनिश्चित करें।
उच्चस्तरीय वार्ताओं के बाद भी हड़ताल जारी रखने पर विभाग ने जताई नाराजगी
विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि बिहार राजस्व कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ विभागीय मंत्री की अध्यक्षता में 14 अक्टूबर और 26 अक्टूबर 2026 को उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में कर्मचारियों की जायज मांगों पर विभाग द्वारा की गई सकारात्मक कार्रवाई और नियमानुसार निर्णयों से उन्हें अवगत कराया गया था। इसके बावजूद कुछ कर्मियों द्वारा कार्यस्थल पर योगदान न देना प्रशासनिक अनुशासन के विपरीत है।
आम नागरिकों की जरूरी सेवाएं प्रभावित, दाखिल-खारिज और प्रमाण-पत्रों में बाधा
विभाग ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि कर्मचारियों के इस आचरण के कारण न केवल विभागीय प्राथमिकताएं और लोकहित के कार्य बाधित हो रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों को राजस्व से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), प्रमाण-पत्र और अन्य आवश्यक सरकारी सेवाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है, जिससे जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
तय समय में योगदान न देने पर निलंबन, 'ब्रेक इन सर्विस' और वेतन कटौती का आदेश
विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित 24 घंटे के भीतर काम पर न लौटने वाले कर्मियों के इस कृत्य को 'बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली' का उल्लंघन और अनाधिकृत अनुपस्थिति माना जाएगा। ऐसे कर्मियों के विरुद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही, 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के नियम के तहत हड़ताल की अवधि का कोई वेतन देय नहीं होगा और इस अवधि को 'सेवा में व्यवधान' (Break in Service) माना जाएगा।
अपर सचिव अमित कुमार पाण्डेय के हस्ताक्षर से जारी आदेश, शून्य-सहिष्णुता की नीति
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव अमित कुमार पाण्डेय द्वारा जारी इस निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार शून्य-सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है। समयासीमा बीतने के बाद भी अनुपस्थित पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभाग किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगा और कड़े कदम उठाएगा।