Patna Traffic Police: 500 के चालान पर सस्पेंशन का फरमान, क्या नियम लागू करना है अपराध ? पटना ट्रैफिक की कार्रवाई पर ही घिर गई पुलिस, वायरल वीडियो का सच क्या?पढ़िए
Patna Traffic Police: ऑटो चालक खुद कम पैसे देकर छूटने की जुगत में था। यानी सेटिंग की पेशकश उधर से आई, जिसे प्रिया ने ठुकरा दिया। ऐसे में घूस’ का इल्ज़ाम कितना जायज है...
Patna Traffic Police: पटना की सड़कों पर इस वक़्त सिर्फ़ ट्रैफिक नहीं, बल्कि इल्ज़ाम, सफ़ाई और सवालों का धुआँ भी तैर रहा है। मामला एक वायरल वीडियो से भड़का, जिसमें यातायात पुलिस की परिचारी प्रिया कुमारी पर घूसखोरी का संगीन इल्जाम ठोंक दिया गया। लेकिन जैसे-जैसे वीडियो की तहकीकात गहराई में गई, कहानी में कई ऐसे मोड़ सामने आए, जिसने पूरे केस को शक और सियासत के घेरे में ला खड़ा किया।
दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में प्रिया कुमारी एक ऑटो चालक से 500 रुपये के चालान की बात करती नजर आती हैं। ऑटो ड्राइवर बार-बार 400 रुपये में मामला रफा-दफा करने की गुज़ारिश करता है, लेकिन वीडियो में साफ तौर पर सुनाई देता है कि प्रिया 500 रुपये से कम लेने को तैयार नहीं हैं। अब सवाल ये उठता है क्या सरकारी तय फाइन बताना जुर्म है या फिर सिस्टम के खिलाफ जाने का खामियाज़ा? पटना ट्रैफिक पुलिस के आला अफसरों ने बिना देर किए इस वीडियो को सबूत मानते हुए प्रिया कुमारी को फौरन सस्पेंड कर दिया। विभागीय कार्रवाई का पहिया भी तेज़ी से घुमाया गया , प्रपत्र ‘क’ के तहत जवाब तलब और एक हफ्ते में जांच पूरी करने का फरमान जारी। लेकिन इस फास्ट ट्रैक इंसाफ पर अब उंगलियां उठने लगी हैं।
सूत्रों की मानें तो जिस वक्त ये वीडियो शूट हुआ, प्रिया कुमारी अपनी ड्यूटी के दौरान ऑटो में बैठकर खाना खा रही थीं। अब ये कोई क्राइम सीन नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का आईना भी हो सकता है। चिलचिलाती गर्मी, सड़क किनारे घंटों ड्यूटी, और न बैठने की जगह, न खाने-पीने का इंतजाम क्या ऐसे हालात में एक महिला कर्मी का ऑटो में बैठकर खाना खाना गुनाह बन जाता है?
मामले का दूसरा पहलू और भी दिलचस्प है। वीडियो में जिस डील की बात हो रही है, उसमें साफ झलकता है कि ऑटो चालक खुद कम पैसे देकर छूटने की जुगत में था। यानी सेटिंग की पेशकश उधर से आई, जिसे प्रिया ने ठुकरा दिया। ऐसे में ‘घूस’ का इल्ज़ाम कितना जायज़ है, ये जांच का असली मुद्दा बन गया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर वीडियो में 500 रुपये का चालान ही बताया गया है, जो कि सरकार द्वारा तय फाइन है, तो फिर ये कार्रवाई जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला भी हो सकता है। सवाल ये भी है कि क्या विभाग ने पूरा वीडियो देखा या सिर्फ़ वायरल क्लिप के दबाव में आकर कुर्बानी का बकरा तलाश लिया?
अब पटना ट्रैफिक पुलिस की साख दांव पर है। क्या ये मामला वाकई करप्शन का है या फिर एक ईमानदार कर्मचारी सिस्टम की सियासत का शिकार बन गई? जांच पूरी होने के बाद ही इस मिस्ट्री से पर्दा उठेगा, लेकिन फिलहाल ये केस कानून, सिस्टम और इंसाफ तीनों के लिए एक बड़ा इम्तिहान बन चुका है।
रिपोर्ट- रंजीत कुमार